लोक इंसाफ पार्टी प्रमुख विधायक सिमरजीत सिंह बैंस।
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बिजली संकट झेल रहे पंजाब में बिजली समझौतों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। बिजली की कीमत को लेकर लोक इंसाफ पार्टी ने पावरकॉम के आंकड़ों से बड़ा खुलासा करते कहा कि जिन प्राइवेट थर्मल प्लांट से बिजली का सौदा 2.45 रुपये से 3.03 रुपये प्रति यूनिट में हुआ, कैप्टन सरकार ने पावर परचेज एग्रीमेंट की वजह से वही बिजली साढ़े 6 रुपये प्रति यूनिट से ज्यादा में खरीदी। इसी वजह से अकाली प्रधान सुखबीर बादल चुनौती दे रहे हैं कि सरकार एग्रीमेंट रद्द करके दिखाए। बैंस मंगलवार को जालंधर में पत्रकारों से खास बातचीत कर रहे थे।
लोक इंसाफ पार्टी के प्रमुख सिमरजीत बैंस के मुताबिक राजपुरा के प्लांट में 1400 मेगावाट बिजली पैदा होती है और इसका एग्रीमेंट 3.03 रुपये यूनिट के हिसाब से पंजाब सरकार के साथ हुआ है। तलवंडी साबो स्थित वेदांता ग्रुप में 1980 मेगावाट बिजली का एग्रीमेंट 2.45 रुपये प्रति यूनिट और गोइंदवाल साहिब में 540 मेगावाट के प्लांट का 2.75 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से एग्रीमेंट हुआ है।
इनसे हमें 17716.90 मिलियन यूनिट बिजली मिली। जिसकी कीमत एग्रीमेंट के हिसाब से 5,866 करोड़ रुपये बनती है। यहां पेच है कि बादल सरकार ने समझौता कर दिया कि चाहे बिजली लो या न लो, पंजाब सरकार को प्लांटों को रुपये देने होंगे। इस वजह से 2019-20 में 3585 करोड़ और 2020-21 में 5400 करोड़ रुपया फिक्स चार्जेस देना पड़ा। जिस वजह से हमें बिजली साढ़े 6 रुपये से भी महंगी पड़ी। खास बात यह है कि बिजली का औसतन नेशनल रेट 3.85 रुपये यूनिट और चंडीगढ़ भी 3.44 रुपये यूनिट में खरीदती है। बैंस ने कहा कि पावरकॉम की आमदनी 33109 करोड़ और खर्चे 34268 करोड़ हैं। इससे पावरकॉम को हर साल 1158 करोड़ का घाटा होता है। सबसे बड़ा रेवेन्यू लॉस पावर परचेज एग्रीमेंट के फिक्स चार्जेस की वजह से है।