चुनावी साल में सरकार ने सात विधायकों को तोहफा दिया है। इन्हें मुख्य संसदीय सचिव नियुक्त किया गया है। इनमें शिरोमणि अकाली दल के पांच और भाजपा के दो विधायक हैं। वहीं, शिअद विधायक इंदरबीर सिंह बुलारिया पर गाज गिरी है। उन्हें सीपीएस पद छीन लिया गया है।
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की सिफारिश पर राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने मंगलवार को सात विधायकों को मुख्य संसदीय सचिव नियुक्त किया है। जिनमें शिअद के परगट सिंह, गुरतेज घुगियाना, गुरप्रताप वडाला, मनजीत मन्ना और दर्शन सिंह शिवालिक शामिल हैं। जबकि, भाजपा के दो विधायकों सीमा रानी और सुखजीत कौर शाही को सीपीएस बनाया गया है। परगट सिंह पिछले कुछ समय से पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे थे, उन्हें सीपीएस बना कर नाराजगी दूर करने की कोशिश की गई है। इसके साथ ही सीएम की सिफारिश पर राज्यपाल सोलंकी ने अमृतसर साउथ के अकाली विधायक इंदरबीर सिंह बुलारिया को मुख्य संसदीय सचिव पद से हटाने के आदेश भी जारी किए हैं।
बुलारिया का इस पद से हटना लगभग तय माना जा रहा था। कुछ समय पहले पार्टी ने उन्हें यूथ अकाली दल माझा जोन के इंचार्ज पद से भी हटा दिया था। बुलारिया एक जमाने में कैबिनेट मंत्री बिक्रम मजीठिया के सबसे करीबियों में से एक माने जाते थे। विधानसभा में भी वह मजीठिया के साथ ही नजर आते थे। पर कुछ समय पहले किन्हीं कारणों से उनकी मजीठिया के साथ बिगड़ गई। उसके बाद वह पार्टी के सभी समागमों से नदारद रहने लगे। सीएम या डिप्टी सीएम के दौरे के समय भी बुलारिया नहीं आते थे। फिर बुलारिया ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। अपने हलके में बन रहे सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के विरोध में उन्होंने सरकार के खिलाफ धरना तक दे दिया था। विधानसभा के बजट सेशन में बुलारिया नजर ही नहीं आए थे। उनकी और पार्टी के बीच बढ़ती दूरी से साफ था कि उनका सीपीएस पद जा सकता है।