बातचीत करते-करते विधायक ऑर्थो के वार्ड 12 पहुंच गए और संस्थान में अमृत फार्मेसी योजना पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। ऑर्थो वार्ड में विधायक मरीजों से मिले और उनकी समस्या पूछी। दुर्घटना ग्रस्त मरीज सुशील ने बताया कि उसकी पट्टी तक समय पर नहीं बदली जाती। डॉक्टरों का व्यवहार तक सही नहीं है। इसके अलावा मौके पर राकेश ने भी ऑर्थो विभाग के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की।
वहीं वार्ड में उपचाराधीन महिला एथलीट के परिजनों ने बताया कि लड़की के पैर में समस्या है। उपचार के बगैर डॉक्टर छुट्टी दे रहे हैं। इस पर विधायक ने मौके पर खडे़ डॉक्टर को कहा कि बगैर उपचार किए लड़की को छुट्टी नहीं देनी। आप युवा डॉक्टर हैं, यहां की कालाबाजारी को रोकना आपका कर्तव्य बनता है। आपके युवा होने पर उन्हें आपसे अधिक उम्मीद है कि आप अपना काम बेहतर तरीके से करेंगे।
विधायक और कुलपति की बातचीत के अंश
विधायक : अमृत फार्मेसी की धरातल पर हकीकत जानने के लिए मैंने अपने नाम से एक कार्ड बनवाया और कार्ड पर सिर्फ बलराज लिखवाया, क्योंकि बलराज कुंडू के नाम से स्टोर संचालक को शायद थोड़ा शक हो जाता। दवाइयां लिखवाई और उन दवाइयों को अपने साथी से खरीदवाया। उक्त दवाइयां मैंने बाहर के एक निजी स्टोर और पीजीआई में संचालित अमृत स्टोर दोनों जगह से खरीदवाई। इसकी कीमत अमृत स्टोर पर साढ़े 4 हजार थी, सभी दवाइयां ऑर्थो से संबंधित थीं, जबकि बाहर से यहीं दवाइयां खरीदने पर 40 फीसदी कम दाम पर मिल गई। अमृत स्टोर संचालक व वीसी : हमारे यहां पर निर्धारित कंपनी की दवाइयां निर्धारित रेट पर दी जाती हैं, जबकि आपने बाहर से किसी और कंपनी की दवाइयां ली होंगी।
विधायक : नहीं डॉक्टर साहब दोनों दवाइयां सेम हैं।
वीसी : आप दोनों की कंपनियां चेक करें।
विधायक : जी, कंपनी तो अलग है।
वीसी : इसी कारण रेट में अंतर है।
स्टोर संचालक : हमारी कंपनी व दवाइयां केंद्रीय सरकार की तरफ से मान्यता प्राप्त हैं, यह रेट सरकार की तरफ से ही निर्धारित है।
विधायक : इसका मतलब जो बाहर दवाइयां बेची जा रही हैं वे मान्यता प्राप्त नहीं है। यदि ऐसा है तो वीसी साहब आप उन पर शिकंजा क्यों नहीं कसते, वे दवाइयां कैसे बिक रही हैं। यह स्टोर दूसरी जगह से क्यों खुलवाया और ऑर्डर किस लिए जारी किए गए कि बाहर से खरीदी गई दवाई मान्य नहीं होगी। चोर बाजारी के लिए यह स्टोर यहां खोला गया है और यह ऑर्डर जारी किया गया है।
वीसी : यदि आपको ऐसा लगता है तो तो आप सरकार की तरफ से छापामारी करवाओ, यहां भी और बाहर भी।
विधायक : देखिए मैं पार्ट ऑफ गवर्नमेंट हूं। मुझे 4 लाख लोगों ने विधायक चुना है। मेरे पास पीजीआईएमएस की शिकायतें रोज आ रही थीं, इसी वजह से मैं यहां आया हूं। यह स्टोर प्रधानमंत्री ने इसीलिए खुलवाया है कि जो दवाई बाहर से 100 की मिले वह यहां पर गरीब लोगों को उचित दाम में मिले।
परिजन : दवाइयों की पर्ची दिखाते हुए कहा कि हमें यहां दवाइयां बहुत महंगी दी जा रही हैं। बिल मांगने पर बिल भी नहीं दिया जाता। हमारे साथ बदतमीजी भी की जाती है। फोन नंबर मिलाओ तो इनके फोन भी नहीं मिलते।
विधायक : वीसी साहब, क्या इन्हीं सबके लिए आपने यह स्टोर यहां पर खुलवाया है। आप इस चोर बाजारी को रोकने की जगह इनको जस्टिफाई कर रहे हैं, जो कि सरासर गलत है।
अमृत फार्मेसी भारत सरकार के हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर उपक्रम के अंतर्गत आता है। भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय एचएलएल के माध्यम से देशभर में अमृत स्टोर चलाता है। संस्थान ने अमृत फार्मेसी को अपनी सिर्फ जगह मुहैया करवाई है। फिलहाल मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वार्ड 12 के सामने स्टोर खोला गया है, ताकि आपरेशन वाले मरीजों को दूर न जाना पडे़।
अमृत फार्मेसी सभी प्रकार के इंप्लांट, लेंस एवं मेडिसन उपलब्ध करवाती है। देश भर के मेडिकल कॉलेजों में अमृत फार्मेसी संचालित हो रही है। इसके रेट भारत सरकार द्वारा तय किए जाते हैं तथा इन पर छूट की तादात भी भारत सरकार ही निर्धारित करती है। निर्धारित रेट से अधिक दाम पर दवाईयां बेचने की शिकायत संस्थान को मिलती हैं, तो प्रभाव से जांच करवाकर संस्थान भी इस पर कार्रवाई करेगा और भारत सरकार को भी आगामी कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। फिलहाल इस संबंध में कोई भी लिखित शिकायत नहीं मिली है। - डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस
पीजीआईएमएस निरीक्षण के बाद मीडिया से बोले विधायक कुंडू
पीजीआईएमएस में निरीक्षण के बाद विधायक बलराज कुंडू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि धांधली पूर्व मंत्री मनीष कुमार ग्रोवर की शह पर हो रही है। वे पूरे जिले के मठाधीश बन कर बैठे हैं। पीजीआईएमएस का कोई डॉक्टर अगर मंत्री के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता था, तो वह उसे या तो घर बैठा दिया जाता है या कही दूर ट्रांसफर करवा दिया जाता है।
यह आवाज पहले भी उठाई थी, लेकिन तब राजनीति में मेरा कोई वजूद नहीं था। यहां के मठाधीशों ने भी किसी की आवाज को उठने नहीं दिया। इतना हीं नहीं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को भी यहां तक नहीं आने दिया गया। बाहर ही बाहर से अपनी उपलब्धियां बताकर उन्हें हमेशा गुमराह रखा गया। एक बड़ा गुंडा यहां पर बैठा रखा था, जिसने इस तरह के भ्रष्टाचार को बढ़ाया है।
विधायक से बातचीत के अंश
सवाल : आप पहले पार्टी में ही थे तो क्या घोटाला व भ्रष्टाचार पहले नहीं था?
विधायक : मेरे सामने ये मामला अभी आया है, तो सार्वजनिक कर दिया। अब ये मामला उठा कर गलती कर दी क्या?
सवाल : भाजपा सरकार में एक ही पूर्व मंत्री भ्रष्टाचारी है या और कोई भी है। आपने सरकार को समर्थन क्यों दिया?
विधायक : देखिए, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। मैंने ईमानदार पीएम व सीएम को समर्थन दिया है। अगर इस तरह के और कोई मंत्री भी होंगे तो उनके बारे में भी सबूत इकट्ठा करूंगा। आने वाले तीन दिनों के भीतर इससे बड़ा घोटाला आपके सामने ले कर आऊंगा।
सवाल : आप पार्षद भी रहे हैं, चेयरमैन भी रहे हैं, तब आपने ये बात क्यों नहीं उठाई?
विधायक : आपने उस समय कभी ये नहीं आवाज उठाई कि चेयरमैन का पद भी बड़ा होता है। तब मेरा इतना महत्व नहीं था।
सवाल : आपने अभी ही क्यों इस मुद्दे क्यों उठाया?
विधायक : ये ही तो दुर्भाग्य की बात है कि कोई भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाता है तो उस पर कई तरह के सवाल उठाए जाते हैं।
सवाल : क्या अब आप और मंत्रियों के घोटाले सामने लाएंगे?
विधायक : मैं इतना बड़ा ठेकेदार नहीं हूं, लेकिन जब भी कही भ्रष्टाचार होने की बात सामने आएगी तो उस बात को इसी तरह से उजागार करूंगा।
सवाल : अब आप क्या करेंगे?
विधायक : शुक्रवार को कष्ट निवारण बैठक में गृह मंत्री अनिल विज आ रहे हैं। उनके सामने ये पूरे तथ्य रखूंगा। मुझे उम्मीद है हरियाणा का गब्बर इस पर जरूर संज्ञान लेगा।
निजी केमिस्ट शॉप और निजी इंप्लांट सप्लायरों की मनमानी कीमत वसूलने पर स्वास्थ्य विभाग के एसीएस अमित झा के निर्देशों पर पीजीआईएमएस के व्यसायिक केंद्र पर पहला अमृत स्टोर खोला गया। इसमें व्यवधान डालने के लिए कोर्ट केस तक किया गया, लेकिन प्रशासन ने कानूनी लड़ाई लड़ते हुए मरीजों के लिए अमृत फार्मेसी स्टोर खुलवाया। इसके बाद भी जब निजी केमिस्टों व निजी इंप्लांट सप्लायरों की मनमानी नहीं रुकी और ऑपरेशन थियेटर व मरीजों के बेड़ों तक एजेंटों की पहुंच रही तो प्रशासन ने वार्ड 12 के बाहर अमृत फार्मेसी स्टोर खुलवाया।
स्थिति यह है कि संस्थान अवैध रूप से लाखों रुपये के इंप्लांट जब्त हैं और मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। हैरानी तो इस बात की है कि संस्थान और निजी इुंप्लांट सप्लायरों की कानूनी लड़ाई में ऑर्थो विभाग के डॉक्टर भी अपने ही प्रशासन के खिलाफ पार्टी बने हैं। अब निजी केमिस्ट शॉप और निजी इंप्लांट सप्लायर अमृत फार्मेसी स्टोर के खुलने के बाद कंप्टीशन में आ गए हैं और दावा करते हैं कि वह स्टोर से कम कीमत में सामान उपलब्ध कराते हैं। हालांकि अमृत फार्मेसी स्टोर के अधिकारियों का कहना है कि उनकी कीमत सेंटर से तय होती है।
उनको फेल करने के लिए यदि कोई कम कीमत में सामान बेच रहा है तो वह क्या कर सकते हैं, लेकिन यह भी अधिक समय नहीं चलेगा, क्योंकि विक्रेता अपनी जेब से अधिक समय तक सामान नहीं दे सकता। अमृत फार्मेसी के प्रबंधक राजशेखर से जब इस संबंध में कुछ दिन पूर्व बात की गई तो उन्होंने भी आश्वास दिया था कि वह अपने यहां की कीमत में और बाजार की कीमत का सर्वे करवाएंगे। यदि कीमत में कोई अंतर है तो अधिकारियों से बात की जाएगी।
पहले किया सम्मान बाद में की फजीहत
विधायक कुंडू ने पहले पीजीआईएमएस के प्रशासनिक अधिकारियों का सम्मान किया, लेकिन वार्ड 12 में पहुंचते ही उनकी फजीहत शुरू कर दी। वार्ड में मरीजों की निजता को सरेआम भंग किया गया। व्यवस्था टूटता देख सभी प्रशासनिक अधिकारी विधायक की मौजूदगी के बावजूद बीच में ही चले गए।
जांच के ये रहेंगे बिंदु
- अमृत फार्मेसी और निजी शॉप के रेट में अंतर क्यों आया।
- किस डॉक्टर ने बगैर नियम ओपीडी कार्ड पर सीधा ऑपरेशन और ऑपरेशन का सामान मंगाया।
- विधायक के समक्ष रखी समस्याओं के लिए कौनसा डॉक्टर जिम्मेदार है।
- तीन डॉक्टरों की टीम करेगी जांच
- डॉ. एसएस लोहचब के नेतृत्व में दो अन्य डॉक्टर इस मामले की जांच करेंगे।