चंडीगढ़। गीला सूखा कचरा अलग अलग लेने के लिए नगर निगम ने युद्ध स्तर पर तैयारियां की थीं। लोगों को जागरूक किया और नहीं माने तो चालान भी किया। इस सख्ती में निगम ने अपने कर्मचारियों को भी नहीं छोड़ा, लेकिन कुछ दिन की सख्ती के बाद अब फिर वही हालात हैं। न लोग अलग अलग कचरा दे रहें हैं और न निगम के कर्मचारी इसे लेकर गंभीरता दिखा रहे हैं।
2 अक्तूबर को चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने कैपिटल कॉम्लेक्स में शहर के लोगों को संबोधित करते हुए स्वच्छता अभियान में सहयोग करने की अपील की थी। उसके बाद लोगों को जागरूक किया गया। 13 अक्तूबर से नगर निगम ने फैसला लिया कि अब चालान किया जाएगा। गीला सूखा कचरा अलग अलग न देने वालों के प्रतिदिन चालान हुए, मिक्स कचरा लेने वाले कर्मचारियों का भी चालान हुआ। कुछ दिन तो लोगों में डर रहा, लेकिन अब हालात जस के तस हैं। लोग मिक्स कचरा दे रहे हैं और कर्मचारी भी गंभीर नहीं है। ऐसे में चंडीगढ़ को स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर नंबर पर लाना संभव नहीं लग रहा है। स्वच्छता रैंकिंग में कचरा सेग्रीगेशन के सबसे ज्यादा नंबर मिलते हैं।
एनजीटी की सख्ती भी नहीं आई काम
एनजीटी ने सूख व गीला कचरा अलग अलग न देने पर नगर निगम को जुर्माना लगाने की चेतावनी दी थी। इस बात को नगर निगम कमिश्नर ने भी स्वीकार किया था कि यदि जल्द कचरा सेग्रीगेट नहीं लिया गया तो बड़ा जुर्माना लगना तय है। बावजूद इसके न शहर केलोग जागरूक हुए और न कर्मचारियों ने मामले को गंभीरता से लिया।
डोर टू डोर कचरा कलेक्शन लेने वालों से नहीं हो सका समझौता
नगर निगम ने कई बार कोशिश की कि डोर टू डोर कचरा लेने वाले कर्मचारियों से बैठक कर एमओएयू हस्ताक्षर कर लिया जाए। हर बार किसी न किसी बात को लेकर मामला उलझ जाता है। इस कारण करोड़ों रुपए के वाहन इंडस्ट्रियल एरिया में खड़े हैं।
कोट
लोगों को लगातार जागरूक कर रहे हैं। न मानने वालों को नोटिस भी दे रहे हैं। कई बार लोग जबरन मिक्स कचरा डाल देते हैं।
-डॉ एपी सिंह, एमओएच, नगर निगम