देशभर में सड़क हादसों में मरने वालों के बारे में रिपोर्ट ने यह खुलासा भी किया है कि कुल 4,12,432 हादसों में से 1,28,825 (31.2 फीसदी) राष्ट्रीय राजमार्गों व एक्सप्रेस-वे पर, 96,382 (23.4 फीसदी) हादसे स्टेट हाईवे पर और शेष 1,87,225 (45.4 फीसदी) अन्य सड़कों पर हुए। इनमें ज्यादातर मृतकों की उम्र 18-45 वर्ष है और यह कुल दुर्घटना मृत्यु का लगभग 67 प्रतिशत है। वर्ष 2021 के दौरान शीर्ष 10 राज्यों में, राष्ट्रीय राजमार्गों पर सबसे ज्यादा सड़क हादसे तमिलनाडु में हुए जबकि सड़क हादसों में सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में हुईं।
पंजाब में 2021 में हुए कुल 10983 सड़क हादसे
रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में वर्ष 2021 के दौरान 5871 सड़क हादसे हुए, जिनमें 4589 लोगों की मौत हुई। इन हादसों में 3072 लोग घायल भी हुए। सबसे गंभीर किस्म के सड़क हादसों की संख्या 4250 रही और इस मामले में पंजाब देश में 15वें स्थान पर रहा। सड़क हादसों में मौतों के मामले में पंजाब 78.2 फीसदी की दर से देश में तीसरे स्थान पर रहा।
राज्य में 2021 के दौरान कुल 10983 हादसे हुए, 4250 गंभीर हादसे, 1034 हादसों में लोगों को गंभीर चोटें आईं, 522 हादसों में मामूली चोटें आईं जबकि 65 हादसों में किसी को चोट नहीं पहुंची। इनमें से पंजाब से गुजरते राष्ट्रीय राजमार्गों पर 2288 हादसे हुए, जिनमें 1950 लोगों की जान गई और 1100 लोग घायल हुए।
2020 के मुकाबले सड़क हादसे बढ़े
सड़क हादसों में मारे गए प्रति 100 लोगों के हिसाब से वर्ष 2020 में जहां हादसों की संख्या 36 फीसदी रही, वहीं 2021 में यह बढ़कर 37.3 फीसदी हो गई। 2021 के दौरान मिजोरम (81) में उच्चतम दुर्घटना गंभीरता दर्ज की गई। इसके बाद बिहार (80) और पंजाब (78) तीसरे नंबर पर रहे।
लगभग 60 फीसदी राज्यों में गंभीर सड़क हादसों की संख्या राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। मध्य प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना में सड़क हादसे और उनमें लोगों की मौत के आंकड़े राष्ट्रीय औसत से कम रहे जबकि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में हादसे और मौतों की संख्या राष्ट्रीय औसत से अधिक रही।
ओवरस्पीड ने ली 40450 लोगों की जान
वर्ष 2021 के दौरान ओवरस्पीड के कारण 95785 हादसे हुए जिनमें 40,450 मौतें हुईं। शराब पीकर वाहन चलाने वालों ने 2949 दुर्घटनाएं कीं, जिनमें 1352 लोगों की जान गई। वहीं, रांग साइड (गलत दिशा से) ड्राइविंग के कारण 5568 हादसे हुए, जिनमें 2823 लोगों ने जान गंवाई। रेड लाइट जंप करने के 555 मामलों में 222 लोगों की जान गई जबकि वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने के कारण 1997 हादसे हुए, जिनमें 1040 लोगों की मौत हुई।