पाकिस्तान सेना प्रमुख से गले मिलकर चौतरफा आलोचनाओं में घिरे नवजोत सिंह सिद्धू की मुश्किलें कम नहीं हो रहीं। विपक्षी दलों ने तो सिद्धू पर हमले तेज किए ही थे, कांग्रेस के नेताओं ने भी उनकी क्लास लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यह बात अलग है कि कांग्रेस नेता सिद्धू को बंद करने में सियासत की ऊंच-नीच समझा रहे हैं। मंगलवार को पंजाब कैबिनेट की बैठक में भी सिद्धू को अपने साथी कैबिनेट मंत्रियों और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से खरी-खोटी चुपचाप सुननी पड़ी।
नवजोत सिद्धू को लेकर कैबिनेट की बैठक के दौरान जो कुछ हुआ, उसकी जानकारी देते हुए एक कैबिनेट मंत्री ने ही बताया कि बैठक में सिद्धू कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीब ही बैठे थे लेकिन कैप्टन काफी नाराज दिखाई दे रहे थे। उन्होंने सिद्धू के पाक दौरे के दौरान किए गए कामों पर ऐतराज जताया वहीं अन्य कैबिनेट मंत्रियों ने भी सिद्धू से कहा कि उनके द्वारा पाक सेना प्रमुख से गले मिलने की घटना ने पूरी पार्टी को मुश्किल में डाल दिया है।
एक मंत्री ने तो यहां तक कहा कि भाई ऐसी जफ्फी बर्दाश्त नहीं हो सकती जो पार्टी और सरकार के खिलाफ विरोधियों को बोलने का मौका दे दे। कुछ मंत्रियों ने यहां तक कह दिया कि सिद्धू की यह जफ्फी लोकसभा चुनाव में मुसीबत बन सकती है। वहीं, कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी सिद्धू को नसीहत देते हुए ?न सिर्फ उन्हें यह समझाने की कोशिश की कि वे अब एक सियासतदान है, यह भी समझाया कि जो भी बोलें, सोच-समझकर और नापतोल कर बोलें।
माना जा रहा है कि सिद्धू ने इसी नसीहत को धारण करते हुए कैबिनेट की बैठक के तुरंत बाद अपने आवास पर बुलाई प्रैस कांफ्रेंस में अपने चिर-परिचित अंदाज की बजाए कागज पर लिखा नपातुला बयान ही पढ़ा। प्रेस कांफ्रेंस में सिद्धू बेबाक टिप्पणियां और शायरी करते दिखाई नहीं दिए। इससे पहले कैबिनेट की बैठक में भी जब साथी मंत्रियों ने सिद्धू को निशाने पर लिया तो वे चुपचाप सबकी बातें सुनते रहे। उन्होंने किसी भी मंत्री की बातों का विरोध नहीं किया। हां, वे अपने चिरपरिचित अंदाज में मुस्कुराते जरूर रहे।