हरियाणा के एक मंत्री ने आज फिर दोहराया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का देश में आजादी में अहम योगदान रहा है, लेकिन गांधी जी चाहते तो भगत सिंह आज जिंदा होते। ये बयान हैं, प्रदेश के स्वास्थ्य, खेल एवं युवा कार्यक्रम मंत्री अनिल विज के। उन्होंने कहा कि यदि महात्मा गांधी अंग्रेजी सरकार पर दबाव बनाते तो भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी रोकी जा सकती थी।
महात्मा गांधी देश को इकट्ठा करते तो अंग्रेजों की सरकार में इतना दम नहीं था कि वह तीनों को फांसी की सजा दे पाती। अनिल विज सोमवार को अपने आवास पर शहीद सुखदेव के दोहते विशाल का स्वागत करने के बाद बोल रहे थे।
अनिल विज ने कहा कि कांग्रेस और तत्कालीन सत्ता के लोभी नेताओं ने एक सोची समझी साजिश के तहत शहीदों की शहादत को गुमनामी की गर्त में धकेलने के प्रयास किए ताकि लोग उन्हें याद न रख सकें। यह सच्चाई है कि यदि आजादी के बाद ये शहीद जीवित होते तो करोड़ों युवाओं के समर्थन से देश की बागडोर उनके हाथ में होती।
आज लालची नेताओं का नहीं बल्कि शहीदों के सपनों का भारत होता। इतना ही नहीं, इन शहीदों के जीवन दर्शन को स्कूलों के पाठ्यक्रम से भी दूर रखा गया है। कांग्रेस ने अपने नेताओं के नाम पर दिल्ली में कई-कई एकड़ में स्मारक बनवाए हैं, लेकिन शहीद सुखदेव के लुधियाना स्थित मकान को 67 वर्ष तक अनदेखा किया गया है।
इस अवसर पर भाजपा के मंडल अध्यक्ष सोम चोपड़ा, जसबीर जस्सी, बलविंद्र सिंह, भाजपा नेता लक्खी सिंह राणा, ललित चौधरी, ओम सहगल, गुरपाल माजरा, नीतू सचदेवा, आशीष तायल, सुरेंद्र तिवारी, बंटी सोनकर, श्याम सिंगला, गगन थापर, नीता खेड़ा, मूनिया रानी, पुष्पा वैश, राकेश शर्मा, गुलशन तूली, कपिल विज, जगपाल जस्सी, छोटू, राजेश अग्रवाल, अशोक शर्मा, बलकेश वत्स आदि मौजूद रहे।
शहीदों की जीवनी बांटेंगे हरियाणा में: विशाल
शहीद सुखदेव के दोहते विशाल नय्यर ने कहा कि आजादी के लंबे समय बाद स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने हरियाणा से शहीदों के सम्मान के लिए आवाज बुलंद की है। पंजाब के सभी विद्यालयों में बच्चों और युवाओं तक शहीदों के जीवन पर आधारित ‘नौ घरों से फांसी तक’ पुस्तक वितरित करने के प्रयास आरंभ किए हैं और अब हरियाणा व हिमाचल में भी हिंदी व पंजाबी में ऐसी पुस्तकें वितरित की जाएंगी।