टैगोर थिएटर में मिनी थिएटर ब्लाक का उद्घाटन बदनौर ने किया
टैगोर थिएटर में बुधवार को मिनी थिएटर ब्लाक का उद्घाटन चंडीगढ़ के प्रशासक और पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने किया। इस मौके पर उनके साथ चंडीगढ़ के गृह सचिव अनुराग अग्रवाल मौजूद थे। उन्होंने कहा कि टैगोर थिएटर चंडीगढ़ की शान है और इस नए ब्लाक को बनाने का उद्देश्य कलाकारों को ज्यादा सुविधाएं प्रदान करना है।
इस मिनी थिएटर ब्लाक की क्षमता सौ दर्शकों की है। इस मिनी थिएटर में स्टेज फिक्स नहीं है। जैसे चाहें स्टेज को समायोजित किया जा सकता है। इस थिएटर में लगाई गईं आडियंस सीटों का भी समायोजन किया जा सकता है। लाइट्स के लिए स्मार्ट लाइट बोर्ड लगाए गए हैं। थिएटर में साउंड क्वालिटी सिस्टम बॉस कंपनी के हैं। इस थिएटर का किराया भी तीन हजार रुपये से लेकर पैंतीस सौ रुपये तक हो सकता है।
टैगोर थिएटर के डायरेक्टर बलकार सिद्धू ने कहा कि मिनी थिएटर हाईटेक सुविधाओं से लैस है। मिनी थिएटर बनने से ऐसे ग्रुप को ज्यादा लाभ होगा जिनकी ऑडियंस सीमित होती है। मसलन, क्लासिकल डांस, म्यूजिक कंसर्ट और लिट्रेचर से जुड़े कार्यक्रम। इन कार्यक्रमों में वही आते हैं जिनको इनकी समझ होती है और जो इन्हें पसंद करते है। दर्शक भी अपने पसंदीदा कलाकार को करीब से देख सकेंगे।
राज्यपाल की फरमाइश पर फिदा आडियंस
मिनी थिएटर ब्लाक के उद्घाटन के मौके पर चंडीगढ़ सांस्कृतिक विभाग द्वारा गजल गायकी का प्रोग्राम आयोजित किया गया। इस मौके पर गजल गायक रहे जाने माने गजल गायक विनोद सहगल। उन्होंने बशीर बदर के कलाम से कार्यक्रम की शुरुआत की। उनकी पहली गजल ने अगर मैं तलाश करूं तो कोई मिल जाएगा... ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी गजल सुनने के बाद राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर ने मेहंदी हसन की गजल रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ की फरमाइश की तो उन्होंने शानदार ढंग से यह गजल सुनाई। इसके बाद बात निकली है तो फिर दूर तलक जाएगी... पेश की गई।
1961 में हुआ था उद्घाटन
टैगोर थिएटर में मिनी थिएटर ब्लाक का उद्घाटन बदनौर ने किया
टैगोर थिएटर में अब ये हैं सुविधाएं
पहले टैगोर थिएटर में एक ऑडिटोरियम था, अब दो हैं।
पहले से ही यहां दो रिहर्सल हॉल थे, अब रिहर्सल हॉल फ्री में होता है।
टैगोर थिएटर में कार्यक्रम की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी है।
अब कैंटीन के साथ किचन भी तैयार कर दिया गया है।
बुक शॉप का काम भी अब लगभग पूरा हो गया है।
यहां गेट के पास टिकट काउंटर बनाया जाएगा। अभी कार्यक्रम की टिकट के लिए ऑडिटोरियम के बाहर काउंटर बनाया जाता है।
1961 में हुआ था उद्घाटन
सिटी में टैगोर थिएटर की शुरुआत 1957 में हुई थी। उस समय शहर में नाटक करने के लिए काई हॉल नहीं था। कॉलेज, स्कूल और हेल्थ सेंटर के हॉल में नाटक होते थे। 1961 में टैगोर थिएटर का उद्घाटन हुआ, जिसे आदित्य प्रकाश ने डिजाइन किया। आदित्य प्रकाश एक आर्किटेक्ट होने के साथ अच्छे पेंटर और एक्टर रहे। उन्होंने कई नाटकों में एक्ट किया और सेट डिजाइनिंग की। टैगोर थिएटर का उद्घाटन नाटक से हुआ, जिसे मुंबई से आए हुए कलाकारों ने पेश किया था। 590 सीट्स वाले इस थिएटर में माइक सिर्फ अनाउंसमेंट के लिए थे। थिएटर को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि बिना माइक के भी कलाकारों की आवाज आखिरी सीट पर पहुंचती थी।