चंडीगढ़/कीरतपुर साहिब। ‘जिउंदा रह पुत्तर। यह तीन शब्द जब सुनता था तो मैं अपने आपको धन्य समझता था। जब भी पिता से फोन पर बात करता था तो वह मेरे अभिवादन का इसी तरह जवाब देते थे। अब मैं यह्य शब्द कभी नहीं सुन सकूंगा’।
कीरतपुर साहिब में अपने महान पिता मिल्खा सिंह की अस्थियां विसर्जित करते समय जीव मिल्खा बेहद दुखी नजर आए। भावुक होते हुए जीव ने कहा कि अब उन्हें कौन यह बात कहेगा। कौन आशीर्वाद देगा। बिलखते भाई को बहनों ने संभाला।
फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह की अस्थियां रविवार सुबह कीरतपुर साहिब के गुरुद्वारा श्री पातालपुरी साहिब में विसर्जित कर दी गईं। जीव मिल्खा सिंह ने नम आंखों से बहनों के साथ पिता को अंतिम विदाई दी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता ने देश का नाम रोशन किया है, हालांकि वह बीमारी के कारण जिंदगी की जंग हार गए, लेकिन पिता ने अंतिम समय तक केवल संघर्ष का रास्ता ही दिखाया है।
गमगीन परिवार सुबह 8.30 बजे चंडीगढ़ सेक्टर-25 से उनकी अस्थियां लेकर निकला और 9.30 बजे कीरतपुर साहिब पहुंच गया। जीव मिल्खा सिंह, बहन सोनिया सांवलका, बहनोई मनीष सांवलका और मोना मिल्खा सिंह के अलावा अन्य पारिवारिक सदस्य साथ थे। गुरुद्वारा साहिब में भाई निर्मल सिंह ने अंतिम अरदास करते हुए स्वर्गीय मिल्खा सिंह की आत्मिक शांति की कामना की। इसके बाद पूरा परिवार 12.30 बजे चंडीगढ़ सेक्टर 8 स्थित अपने निवास पहुंच गया।
पितृ दिवस पर देते थे उपहार
जीव मिल्खा सिंह का अपनी मां और पिता से गहरा लगाव था। हर साल पितृ दिवस पर वह उनके लिए उपहार भी लाते थे। कभी शर्ट तो कभी टी-शर्ट और कई बार तो गुलाब का फूल भी दे दिया करते थे। जीव मिल्खा सिंह जब पितृ दिवस के दिन कहीं विदेश में टूर्नामेंट खेल रहे होते तो फोन पर पिता मिल्खा सिंह से बात जरूर करते थे।