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मिल्खा सिंह-निर्मल मिल्खा की अंतिम अरदास, कई लोगों ने दी श्रद्धांजलि

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चंडीगढ़। पद्मश्री मिल्खा सिंह और उनकी पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह की बुधवार को अंतिम अरदास की गई। सेक्टर- 8 के गुरुद्वारा में बेटे और अंतरराष्ट्रीय गोल्फर जीव मिल्खा सिंह ने समस्त रीति रिवाज के साथ अंतिम अरदास की। इस मौके पर उनकी पत्नी कुदरत कौऱ, बेटे हरजय मिल्खा सिंह, जीव की बहनें सोनिया और मोना भी साथ में थे। दोपहर 12 से लेकर 1 बजे तक अंतिम अरदास का कार्यक्रम चला। अंतिम अरदास को यू ट्यूब पर भी लाइव दिखाया गया, जिसे देश और विदेशों से कुल 3400 लोगों ने लाइव देखा।
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खेल और राजनीतिक लोगों ने दी श्रद्धांजलि
मिल्खा सिंह और उनकी पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह की अंतिम अरदास में श्रद्धांजलि देने खेल जगत से अर्जुन अवार्डी गोल्फर हरमीत काहलो और गोल्फर करनदीप कोचर पहुंचे। वहीं राजनीतिक लोगों में पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता एचएस लकी, एरिया पार्षद और निगम के सीनियर डिप्टी मेयर महेश इंदर सिंह, भाजपा चंडीगढ़ के अध्यक्ष और पार्षद अरुण सूद, भाजपा नेता रामवीर भट्टी, पंजाब के पूर्व मंत्री परमिंदर ढींडसा ने भी श्रद्धांजलि दी।
जीवन साथ में गुजारा, अंतिम अरदास भी साथ में हुई
मिल्खा सिंह और भारतीय वॉलीबाल की पूर्व कप्तान उनकी पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह ने साथ में जीवन व्यतीत कर सुख और दुख सांझा किया। कोरोना से संक्रमित होने की वजह से 13 जून को निर्मल मिल्खा का निधन हो गया था। इसके ठीक 5 दिन के बाद 18 जून को मिल्खा सिंह भी अपने जीवन की रेस हार गए। वह भी कोरोना संक्रमित थे, लेकिन निधन से कुछ दिन पहले उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। 19 जून को राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। देश-विदेश से उनके लिए शोक संदेश दिए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया था।
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अधूरी रह गई हसरत, टोक्यो ओलंपिक देखने से हुए वंचित
1960 में रोम ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहे मिल्खा सिंह की एक ही हसरत थी कि कोई देश का एथलीट एथलेटिक्स में मैडल लेकर आए, लेकिन उनकी यह इच्छा अधूरी रह गई। उनका निधन टोक्यो ओलंपिक शुरू होने में पहले ही हो गया।
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