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कोरोनाः मिड डे मील बंद, कुकिंग कॉस्ट खाते में, अनाज का पैकेट घर पहुंचेगा

Sun, 22 Mar 2020 02:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
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demo pic - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना वायरस ने स्कूली छात्रों के मिड डे मील को भी ग्रहण लगा दिया है। एहतियातन स्कूलों की छुट्टियां हो चुकी हैं और उनका मिड डे मिल भी बंद कर दिया गया है। लेकिन फिर भी सरकार ने जिलों के मौलिक शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिया है कि मिड डे मील के अंतर्गत कुकिंग कास्ट तो लाभार्थी छात्रों के खाते में जमा करवा दी जाए और अनाज के सीलबंद पैकेट बनाकर उन्हें उनके घरों तक पहुंचवा दिया जाए।

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मौलिक शिक्षा निदेशालय हरियाणा ने इस संदर्भ में निर्देश विभिन्न जिलों के मौलिक शिक्षा अधिकारियों को भेज दिए हैं। मौलिक शिक्षा अधिकारियों को 25 मार्च तक यह काम निपटा कर शाम 5 बजे तक रिपोर्ट मुख्यालय भेजने को कहा गया है।

सरकार के फरमान से अध्यापक वर्ग नाराज
छात्रों के घरों में जाकर मिड डे मील वितरित करने के फरमान पर शिक्षक वर्ग नाराज हो गया है। प्राइमरी टीचर एसोसिएशन के प्रेस प्रवक्ता विनोद रोहिल्ला ने इस बात पर कड़ा एतराज जताया है कि विभाग ने बिना सोचे यह पत्र जारी किया है। 
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एसोसिएशन के राज्य महासचिव बलजीत पूनिया व रणधीर बूरा ने कहा है कि प्रदेश के सभी प्राइमरी शिक्षकों की भावनाएं बच्चों व उनके गरीब अभिभावकों के साथ हैं, अध्यापक उनकी मदद भी करना चाहते हैं परंतु सरकार का वर्तमान में जारी किया फरमान कि अध्यापक प्रतिदिन  घर-घर जाकर बच्चों को राशन वितरित करेंगे व कुकिंग कोस्ट की राशि उनके खाते में डालेंगे, यह गलत है, क्योंकि बच्चा केवल 6 घंटे स्कूल में रहता है और इसके बाद 18 घंटे बचा घर पर ही रहता है। बच्चे का सारा राशन घर पर ही बनता है। 

अगर सरकार बच्चों की मदद करना चाहती है तो सरकार के पास सभी बच्चों के खाते हैं, क्यों न सरकार खुद ही पंचकूला से पूरे प्रदेश के बच्चों के खातों में पैसे डाल दे। जिससे बच्चों की मदद भी हो जाएगी और अभिभावकों की भी मदद हो जाएगी। रोहिल्ला का कहना है कि गर्मियों में 1 महीने की और सर्दियों में 15 दिन की छुट्टी होती है तब भी उन्हें घर जा कर राशन नहीं दिया जाता। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने भी इस फरमान का विरोध जताया है।

विदेश से लौटने वाले अफसर-कर्मचारी पहले सीएमओ को रिपोर्ट करेंगे
विभिन्न विभागों का कोई भी अफसर या कर्मचारी जो विदेश से वापस लौटेगा। उसे सबसे पहले सिविल सर्जन को रिपोर्ट करनी पड़ेगी। ऐसे कर्मचारियों और अफसरों को मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। इन कर्मचारियों और अफसरों को कोरोना वायरस से संबंधित स्क्रीनिंग करवानी पड़ेग। उसके बाद सिविल सर्जन उन्हें फिटनेस सर्टिफिकेट देंगे। उसके बाद ही यह अफसर और कर्मचारी अन्य लोगों के संपर्क में आएंगे।

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