फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चंडीगढ़ में मेट्रो चलाने के लिए प्रशासन ने बुलाई हाई प्रोफाइल मीटिंग, तारीख तय

Thu, 11 Aug 2016 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
विज्ञापन
मेट्रो - फोटो : demo
विज्ञापन
चंडीगढ़ मेट्रो प्रोजेक्ट की राह में लगातार आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए प्रशासन ने हाई प्रोफाइल मीटिंग बुलाई है। 17 अगस्त को मीटिंग में पंजाब और हरियाणा  डीएमआरसी के अधिकारी भी शामिल होंगे। पंजाब और हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी को मीटिंग में शामिल होने के लिए लिखा गया है। चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व एडवाइजर परिमल राय करेंगे।
विज्ञापन


चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट में हिस्सेदार हैं। मेट्रो प्रोजेक्ट में अब प्रापर्टी डेवलपमेंट प्लान के लिए 200 एकड़ जमीन उपलब्ध नहीं हो पाने का पेच फंस गया है। जमीन उपलब्ध नहीं करवा पाने के कारण यूटी प्रशासन इस प्रोजेक्ट में हिस्सेदार पंजाब और हरियाणा से इस पर बात करेगा। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने मेट्रो डीपीआर ऑब्जर्वेशंस में चंडीगढ़ से प्रापर्टी डेवलपमेंट प्लान के तहत 200 एकड़ जमीन मांगी है। जमीन नहीं दे पाने की स्थिति में 1 हजार करोड़ रुपये सालाना की व्यवस्था के लिए कहा है। दोनों ही मामलों में चंडीगढ़ प्रशासन असफल साबित हो रहा है। 

कहां से आएगी 200 एकड़ जमीन
प्रशासन के पास इस समय अधिग्रहीत की गई जमीन में से 600 एकड़ भूमि बची है। यह भी विभिन्न संस्थानों केलिए आरक्षित है। आईटी पार्क फेज-3 के लिए जिस भूमि का अधिग्रहण किया गया था, वह भी प्रशासन पहले ही सुप्रीम कोर्ट में अधिग्रहण रद्द होने के बाद किसानों को वापस लौटा चुका है।
विज्ञापन


 
विज्ञापन

अवलोकन के लिए भेजी थी रिपोर्ट

मेट्रो - फोटो : demo
ऐसे में 200 एकड़ जमीन प्रापर्टी डेवलपमेंट प्लान के लिए अलग से निकालना संभव नहीं है।  रही बात प्रति वर्ष 1 हजार करोड़ रुपये अदा करने की तो यह भी दूर की कौड़ी है। यूटी प्रशासन का सालाना प्लान बजट ही 700 करोड़ है। इसकेअलावा मेट्रो प्रोजेक्ट पर भी 13 हजार 909 करोड़ रुपये का बजट खर्च होना है। जिसमें बड़ा हिस्सा यूटी प्रशासन को देना है। ऐसे में अलग से 1 हजार करोड़ रुपये निकालना नामुमकिन साबित हो रहा है।

अवलोकन के लिए भेजी थी रिपोर्ट
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने यूटी प्रशासन को प्रापर्टी डेवलपमेंट प्लान और कई अन्य मुद्दों पर अवलोकन को कहा था। जिसके बाद पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के अधिकारियों ने आपस में मीटिंग भी की। इन सभी बिंदुओं पर डीएमआरसी से विस्तृत प्लान मांगा गया था। जिस पर डीएमआरसी ने अतिरिक्त 200 एकड़ जमीन की मांग रखी है।

प्रोजेक्ट में लगातार हो रही देरी
मेट्रो प्रोजेक्ट में लगातार देरी हो रही है। डीपीआर फाइनल होने के बाद वर्ष 2016 में इसका ग्राउंड लेवल पर काम शुरू होना था और 2021 में काम पूरा हो जाना था। लेकिन जुलाई बीतने के बाद अब तक डीपीआर ही फाइनल नहीं हो पाई है। जिस कारण ग्राउंड लेवल पर काम भी नहीं शुरू हो पाया है। इस देरी के चक्कर में एस्टीमेट बजट भी 10 हजार 909 करोड़ से 13 हजार 900 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें