चंडीगढ़ मेट्रो प्रोजेक्ट की राह में लगातार आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए प्रशासन ने हाई प्रोफाइल मीटिंग बुलाई है। 17 अगस्त को मीटिंग में पंजाब और हरियाणा डीएमआरसी के अधिकारी भी शामिल होंगे। पंजाब और हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी को मीटिंग में शामिल होने के लिए लिखा गया है। चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व एडवाइजर परिमल राय करेंगे।
चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट में हिस्सेदार हैं। मेट्रो प्रोजेक्ट में अब प्रापर्टी डेवलपमेंट प्लान के लिए 200 एकड़ जमीन उपलब्ध नहीं हो पाने का पेच फंस गया है। जमीन उपलब्ध नहीं करवा पाने के कारण यूटी प्रशासन इस प्रोजेक्ट में हिस्सेदार पंजाब और हरियाणा से इस पर बात करेगा। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने मेट्रो डीपीआर ऑब्जर्वेशंस में चंडीगढ़ से प्रापर्टी डेवलपमेंट प्लान के तहत 200 एकड़ जमीन मांगी है। जमीन नहीं दे पाने की स्थिति में 1 हजार करोड़ रुपये सालाना की व्यवस्था के लिए कहा है। दोनों ही मामलों में चंडीगढ़ प्रशासन असफल साबित हो रहा है।
कहां से आएगी 200 एकड़ जमीन
प्रशासन के पास इस समय अधिग्रहीत की गई जमीन में से 600 एकड़ भूमि बची है। यह भी विभिन्न संस्थानों केलिए आरक्षित है। आईटी पार्क फेज-3 के लिए जिस भूमि का अधिग्रहण किया गया था, वह भी प्रशासन पहले ही सुप्रीम कोर्ट में अधिग्रहण रद्द होने के बाद किसानों को वापस लौटा चुका है।