मेट्रो प्रोजेक्ट की बाधाएं दूर करने के लिए मंगलवार को सभी हितधारकों की हाईप्रोफाइल मीटिंग होगी।
इस मीटिंग में पंजाब और हरियाणा ही नहीं दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन (डीएमआरसी) के अधिकारी भी शामिल होंगे। डीएमआरसी ने ही चंडीगढ़ की पूरी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की है। पंजाब और हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी को भी मीटिंग में शामिल होने के लिए लिखा गया है। चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व एडवाइजर परिमल राय करेंगे। चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट में हिस्सेदार हैं। इसलिए सभी के प्रतिनिधि अधिकारी को बुलाया गया है।
मेट्रो प्रोजेक्ट में अब प्रॉपर्टी डेवलपमेंट प्लान के लिए 200 एकड़ जमीन उपलब्ध नहीं हो पाने का पेंच फंस गया है। जमीन उपलब्ध नहीं करवा पाने के कारण यूटी प्रशासन इस प्रोजेक्ट में हिस्सेदार पंजाब और हरियाणा से इस पर बात करेगा। डीएमआरसी ने मेट्रो डीपीआर ऑब्जरबेशंस में चंडीगढ़ से प्रॉपर्टी डेवलपमेंट प्लान के तहत 200 एकड़ जमीन मांगी है।
जमीन न दे पाने की स्थिति में 1 हजार करोड़ रुपये सालाना की व्यवस्था के लिए कहा है। दोनों ही मामलों में चंडीगढ़ प्रशासन असफल साबित हो रहा है। प्रशासन के पास इस समय अधिगृहीत की गई जमीन में से 600 एकड़ जमीन बची है। यह भी विभिन्न संस्थानों के लिए आरक्षित है। ऐसे में 200 एकड़ जमीन प्रॉपर्टी डेवलपमेंट प्लान के लिए अलग से निकालना संभव नहीं है। रही बात प्रतिवर्ष 1 हजार करोड़ रुपये अदा करने की तो यह भी दूर की कोड़ी है। यूटी प्रशासन का सालाना प्लान बजट ही 700 करोड़ है।