इसके बाद उनकी इस दिक्कत को स्थानीय मीडिया ने उठाया और बात सोशल मीडिया से होते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तक जा पहुंची। उन्होंने ट्विटर पर ऐलान करते हुए कहा कि सरकार इसमें मदद करेगी और टीनू और जाहाना दोनों को दिल्ली में विदेश मंत्रालय बुलवा लिया। टीनू बताते हैं कि दफ्तर में आते ही सुषमा स्वराज उनसे बहुत गर्मजोशी से मिली थी।
टीनू की मानें तो सुषमा स्वराज ने उनसे ठेठ हरियाणवी में बात की थी जबकि उनकी विदेशी पत्नी जाहाना से अंग्रेजी में। टीनू के अनुसार सुषमा स्वराज ने तुरंत अपने दफ्तर में अधिकारियों को बुलाकर उनके कागजात पूरे करवाए और एक स्लिप एसपी दफ्तर में जमा करवाने को कहा जिसके बाद उनकी पत्नी जहाना की वीजा अवधि बढ़ गई। हालांकि इसके बाद भी जाहाना टीनू के साथ रिश्ता तोड़कर वापस अपने देश चली गई।
...दूसरी याद
बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रवीण जोड़ा के लिए सुषमा स्वराज एक कभी ना भूलने वाली याद हैं। प्रवीण जोड़ा के साथ सुषमा स्वराज का एक बेहद रोचक किस्सा भी जुड़ा हुआ है। 21 साल पहले 1998 में किसी जनसभा में शिरकत करने के लिए हिसार से सिरसा जाते समय सुषमा स्वराज अचानक से बीजेपी नेता प्रवीण जोड़ा के सिरसा रोड स्थित दफ्तर में पहुंच गई थी।
जोड़ा बताते हैं कि उस समय सिरसा रोड पर भवानी इंडस्ट्रीज के सामने आजाद सचदेवा के साथ संयुक्त दफ्तर था। वो आगे कहते हैं कि अचानक उनके लैंडलाइन पर फोन आया कि सुषमा स्वराज थोड़ी देर में आपके दफ्तर में पहुंचेंगी। इसके बाद जैसे ही वो आवभगत करने के लिए सामान लेने के लिए दफ्तर से बाहर निकले तो बाहर उन्हें सुषमा स्वराज गाड़ी से उतरते मिल गईं।
इसके बाद वो दफ्तर में आई और काफी देर तक प्रवीण जोड़ा से चर्चा करती रही। बीजेपी नेता प्रवीण जोड़ा एक और दिलचस्प किस्सा बताते हैं कि उस समय तक वो अपने नाम को प्रवीन लिखते थे लेकिन उस दिन सुषमा स्वराज ने उन्हें कहा कि सही मायनों में प्रवीण लिखा जाता है, जिसके बाद उन्होंने अपने नाम को प्रवीन की जगह प्रवीण लिखना शुरू कर दिया।
एक साल बाद टीवी पर दिया फतेहाबाद से गई चिट्ठी का जवाब
‘जनहित की बात को लेकर पोस्ट कार्ड पर हर दिन खत लिखता रहा हूं। चालीस साल से यही किया है। इस तरह से एक बार मैंने सुषमा स्वराज जी को चिट्टी लिखी थी बहुत साल पहले जब वो सूचना प्रसारण मंत्री थी। अखबार में खबर इश्तिहार पढ़ कर सच लिखना जरूरी था।
मैंने उनको लिखा था आपको हिसार टेलीविजन केंद्र की आधारशिला रखने आना है, सूचना पढ़कर हैरानी हुई है। आपको जानकारी देना चाहता हूं कि दो बार पहले शिलान्यास किया जा चुका है और लाखों रूपये खर्च हुए हैं। मगर बना नहीं है कुछ भी, क्या फिर से ये बार बार होता रहेगा।
कोई जवाब नहीं आया था। शिलान्यास घोषित किया जा चुका था और उनको आना ही था। मुझे भी बात आई गई लगती थी। मगर करीब साल भर बाद जब हिसार दूरदर्शन केंद्र का उदघाटन किया गया हम घर बैठे दिल्ली नेशनल चैनल देख रहे थे तब अचरज हुआ कि उनको साल भर पहले लिखा मेरा खत याद रहा।
उन्होंने अपने भाषण में कहा था फतेहाबाद के एक डॉक्टर साहब को आज खुशी हुई होगी कि इस बार उद्घाटन भी किया जा रहा है केवल शिलान्यास नहीं किया गया।' बहुत दु:ख हुआ उनके निधन की खबर सुनकर। ऐसे संवेदनशील राजनेता विरले ही होते हैं। जैसा फतेहाबाद के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ लोक सेतिया ने बताया ।
आखिरी याद...
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से फतेहाबाद की आखिरी याद और तस्वीर पांच बरस पुरानी है। पांच साल पहले 2014 के विधानसभा चुनावों में फतेहाबाद से विस प्रत्याशी स्वतंत्र चौधरी के समर्थन में प्रचार करने के लिए सुषमा स्वराज हिसार रोड स्थित नई सब्जी मंडी में आयोजित जनसभा में पहुंची थी। उन्होंने तकरीबन पौने घंटे तक अपने ओजस्वी भाषण से हजारों की भीड़ को बांधे रखा था।