फिरोजपुर में वैसाखी वाले दिन भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय हुसैनीवाला बार्डर पर विशाल मेला आयोजित किया जाता है। इसके लिए स्पेशल ट्रेन बसें चलाई गई हैं। इस दिन अधिकांश लोग सतलुज दरिया के पानी में नहाने के बाद पूजा पाठ करते हैं, उसके बाद खेतों में गेहूं की कटाई करते हैं। कई लोग शहीदी स्मारक के अंदर बने तालाब में नहाते हैं और शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव की समाधि पर माथा टेकते हैं।
जिला प्रशासन ने मेले में आने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। इस दिन खेतीबाड़ी विभाग, मछली पालन विभाग के अलावा अन्य विभाग के कर्मी अपने विभागों की प्रदर्शनी भी लगाते हैं। हुसैनीवाला बार्डर का रेलवे से काफी पुराना रिश्ता है, हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन से ही होकर ट्रेन पाकिस्तान जाती थी। आज भी रेल पटरी हुसैनीवाला बार्डर तक बिछी हुई है, जबकि सतलुज दरिया में बना केसरी हिंद पुल 1971 की जंग में टूट गया था।
हुसैनीवाला बार्डर के पास बहने वाले सतलुज दरिया के किनारे शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव के पवित्र शरीर का जलाया गया था। यहीं पर बीके दत्त, पंजाब माता (भगत सिंह की मां) की समाधि बनी है। इसके अलावा पाक से लोगों की लाशें ट्रेन से हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन पहुंची थी। इसी मकसद से हुसैनीवाला बार्डर पर वैसाखी का मेला लगाया जाता है। लोग यहां शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं। 23 मार्च को भी हुसैनीवाला बार्डर पर शहीदी मेला लगता है।