शहर के सांसद मनीष तिवारी ने देश के उपराष्ट्रपति व पीयू के चांसलर जगदीप धनखड़ से दिल्ली में मुला
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था सीनेट का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। पीयू के छात्र, पंजाब के नेताओं की तरफ से लगातार नई सीनेट के गठन की मांग उठाई जा रही है। इस बीच शहर के सांसद मनीष तिवारी ने देश के उपराष्ट्रपति व पीयू के चांसलर जगदीप धनखड़ से दिल्ली में मुलाकात की और जल्द सीनेट चुनाव कराने की मांग की है। उधर, वीरवार को पीयू में पंजाब के कांग्रेस-अकाली के कई नेताओं ने छात्रों के साथ धरना दिया।उपराष्ट्रपति के साथ हुई बैठक को लेकर सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि उपराष्ट्रपति को उन्होंने बताया कि पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट का कार्यकाल खत्म हो चुका है और काफी दिन पहले ही चुनाव की नोटिफिकेशन हो जानी थी लेकिन अब तक नहीं हुई है। इस पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। तिवारी ने कहा कि इसके अलावा भी उपराष्ट्रपति से कई मुद्दों पर पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई है। पंजाब यूनिवर्सिटी को किस तरह वर्ल्ड क्लास बनाना है और किस तरह से एकेडमिक सुविधाओं को और मजबूत और समृद्ध करना है, इस पर भी चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि चर्चाओं के सकारात्मक परिणाम जल्द देखने को मिलेंगे। बता दें कि 31 अक्तूबर को सीनेट का कार्यकाल खत्म हो गया है। इसकी वजह से पीयू में प्रशासनिक और नीतिगत निर्णयों में कुछ अस्थिरता का माहौल उत्पन्न हो गया है। पीयू के छात्रों और शिक्षाविदों का कहना है कि सीनेट का गठन जल्द से जल्द किया जाना चाहिए ताकि विश्वविद्यालय सुचारू रूप से कार्य कर सके और महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।
पंजाब के नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा : सीनेट चुनाव को लेकर वीसी कार्यालय के बाहर पिछले कई दिनों से छात्र धरने पर बैठे हैं। वीरवार को उनका साथ देने के लिए पंजाब के कई वरिष्ठ नेता पहुंचे। इसमें पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मंत्री दलजीत सिंह चीमा, सुखपाल खैहरा, दलबीर गोल्डी, बलविंदर सिंह व अन्य रहे। इन नेताओं ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि बीजेपी जानबूझकर सीनेट के गठन में देरी करवा रही है, जो नियमों के विरुद्ध है। बाजवा ने कहा कि उन्होंने पीयू की स्वायत्तता को कम करने और उसमें पंजाब के हक को कम करने की केंद्र सरकार की साजिश के खिलाफ आवाज उठाई। कहा कि वह सीनेट चुनाव कराने, फीस वृद्धि को वापस लेने और पीयू की स्वायत्तता को बनाए रखने की मांग करते हैं। पंजाब की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।