अशक्त आठ वर्षिय रहनुमा रानी का नेचर से इतना लगाव है कि अक्सर प्रकृति के रंग को कैनवास पर सजाती रहती है।
पैर की अंगुलियों के माध्यम रंग बिरंगे कलर से कैनवास पर फूलों के इधर उधर तितलियों का मंडराना, फूलों के साथ भौरों का खेलना अच्छा लगता है रहनुमा को।
रहनुमा रानी राजीव कालोनी में रहती है। बड़ी होकर एक अच्छी पेंटर बनना चाहती है। नेचर को इस तरह कैनवास पर सजाना चाहती है रहनुमान कि भाग दौड़ जिंदगी में जब भी कोई राहगीर
उसकी पेंटिंग को देखे तो उसे सुंदर प्रकृति की अनुभूति हो। मूल रूप से यूपी बिजनौर की रहने वाली है रहनुमा। जन्म से ही रहनुमा का पूरे शरीर में केवल एक पैर ही ठीक तरीके से काम करता है।
उसकी मां गुलनाज बानों ने बताया कि बचपन से ही उसे पेंटिंग से लगाव है। स्कूल में दाखिला होने के पहले भी अक्सर जमीन पर कोयले से पेंटिंग किया करती थी।
नेचर के बाद रहनुमा को अपनी मातृ भाष हिंदी से लगाव है। मौली कालोनी स्थित गवर्नमेंट हाई स्कूल में आठवीं कक्षा की छात्रा है रहनुमा। उसके पिता शफीक अहमद घरों में पेंटिग का काम करके जीविका चलाते है।