चंडीगढ़। पीजीआई इमरजेंसी में दवा की दुकान बंद हो जाने से वहां भर्ती गंभीर मरीजों का इलाज प्रभावित होने लगा है। स्थिति यह है कि 31 दिसंबर की रात को दुकान बंद होने के बाद मरीजों के परिजनों को इंजेक्शन के लिए सबसे ज्यादा संस्थान से बाहर का चक्कर लगाना पड़ रहा है क्योंकि परिसर स्थित दवा की अन्य दुकानों पर इंजेक्शन की उपलब्धता बेहद सीमित है। वहीं, इस पर पीजीआई प्रवक्ता का कहना है कि जल्द ही अमृत फार्मेसी के साथ समझौता पत्र पर हस्ताक्षर का दुकान का संचालन शुरू किया जाएगा जबकि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए एक-एक मिनट बेहद कीमती है। इमरजेंसी में भर्ती एक मरीज के परिजन ने बताया कि डॉक्टर ने कुछ दवाएं और इंजेक्शन मंगाया था। दवाएं तो पीजीआई की दूसरी दुकानों पर मिल गई, लेकिन इंजेक्शन के लिए सेक्टर- 11 की दवा मार्केट में जाना पड़ा। वहीं, एक अन्य मरीज के परिजन ने कहा कि जब पीजीआई प्रशासन को यह पता है कि इमरजेंसी में दवा की उपब्लधता अति आवश्यक है तो पहले से व्यवस्था करने दुकान बंद करना चाहिए था, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। गंभीर मरीजों के इलाज में बाधा उत्पन्न हो रही है।