फोर्टिस अस्पताल में ‘फाइब्रोस्कैन 502 टच’ फेसिलिटी का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर सेक्टर-32 जीएमसीएच के डॉयरेक्टर प्रिंसिपल डॉ. अतुल सचदेव मुख्य मेहमान थे।
इस मौके बताया गया कि कि फैटी लीवर और लीवर सिरोसिस का पता लगाकर उसका इलाज करने में यह पूरी तरह सुरक्षित विकल्प है।
फोर्टिस के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डा. अरविंद साहनी ने बताया कि लीवर सिरोसिस शरीर में अस्वस्थता और मृत्युदर बढ़ाने वाला अहम कारण है।
दुनिया में इसे लीवर फेल होने का बड़ा कारण या फिर लीवर ट्रांसप्लांट का संकेत बताया जाता है। दुर्भाग्य से जागरूकता की कमी और देरी से पता लग पाने के कारण लीवर की बीमारी बड़ी ही चिंताजनक दर से बढ़ रही है।
इसके आम कारणों में शराब का सेवन, हेपेटाइटिस सी और बी वायरस और गैर-शराब सेवन से फैटी लीवर डिजीज (एनएएफएलडी) शामिल हैं।
जीएमसीएच के डॉयरेक्टर डा. सचदेव ने बताया कि एनएएफएलडी अब बड़ी चिंताजनक और महामारी जैसे हालात पैदा करने लगा है। लीवर सिरोसिस से जल्द उपचार शुरू करके बचा जा सकता है।
इसके लिए सही जीवन शैली अपनाना जरूरी है। इनमें शराब का सेवन बंद करना, मोटापे और मधुमेह पर नियंत्रण पाना, नियमित रूप से कसरत आदि करना शामिल हैं।