चंडीगढ़। पीजीआई में बेहोशी की दवा प्रोपोफोल से मरीजों की मौत के मामले में मांगे गए स्पष्टीकरण के बाद इमरजेंसी स्थित गुप्ता मेडिकोज के संचालक ने वीरवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज रिपोर्ट के साथ डब्ल्यूएचओ की ओर से सर्टिफिकेट ऑफ गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज व संबंधित कंपनी से ली गई दवा की गुणवत्ता का प्रमाणपत्र संलग्न किया गया है।
सूत्रों के अनुसार मेडिकल स्टोर के संचालक ने प्रोपोफोल के संबंधित बैच की एक्सपायरी, बिल और बैच नंबर की डिटेल भी दी है। हालांकि पीजीआई प्रशासन ने इस स्पष्टीकरण पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। संस्थान ने सिर्फ इतना ही कहा कि मेडिकल स्टोर के संचालक का जवाब मिल गया है। वहीं दूसरी ओर मरीजों की मौत के मामले में पीजीआई प्रशासन की ओर से एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट के प्रमुख के नेतृत्व में गठित कमेटी की रिपोर्ट अब तक लंबित है।
तीन बिंदुओं पर जांच अहम
एक ड्रग इंस्पेक्टर के मुताबिक ऐसी स्थिति में दवा की कंपनी के लिए स्वास्थ्य विभाग से जारी गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज सर्टिफिकेट, दवा की गुणवत्ता का प्रमाणपत्र, दवा की एक्सपायरी, बिल वाउचर और बैच नंबर जरूरी होता है। किसी भी दवा का साइड इफेक्ट सामने आने पर इन बिंदुओं की ही जांच की जाती है। इसमें से किसी में भी कमी मिलने पर संबंधित मेडिकल स्टोर पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।
ये है मामला
पीजीआई प्रशासन को मरीजों की ओर से इमरजेंसी स्थित गुप्ता मेडिकोज से प्रोपोफोल आईपी 10 मिलीग्राम खरीदने की जानकारी मिली थी। यह भी मामला संज्ञान में आया था कि उस दवा से मरीजों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था। इसके बाद प्रशासन ने मेडिकल स्टोर संचालक से स्पष्टीकरण मांगा था।
कोट-
इमरजेंसी स्थित गुप्ता मेडिकोज ने वीरवार को स्पष्टीकरण का जवाब सौंप दिया है लेकिन अभी उसे चेक नहीं किया गया है। इसके आधार पर अगली कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। डॉक्टरों की जांच कमेटी की रिपोर्ट अभी पेंडिंग है।
-कुमार गौरव, डीडीए व प्रवक्ता पीजीआई