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मेडिकल कॉलेज में फोटोस्टेट मशीन तक नहीं, मरीजों को लगानी पड़ती है एक किमी की दौड़

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चंडीगढ़। कोरोना महामारी में एक ओर जहां मरीज अस्पतालों की ओपीडी बंद होने से परेशान हैं, वहीं अस्पताल में मिलने वाली सेवाओं में भी कटौती की जा रही है, जिससे मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। जीएमसीएच-32 में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के साथ मरीज के डिस्चार्ज होने पर फोटो कॉपी के लिए उनके परिजनों को अस्पताल से बाहर से एक से डेढ़ किलोमीटर तक का चक्कर लगाना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि देर रात किसी मरीज की मौत होने पर परिजनों को फोटोकॉपी जमा करने के लिए सुबह होने का इंतजार करना पड़ता है या फिर आधी रात को इसके लिए अस्पताल से बाहर जाना पड़ रहा है।
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यही स्थिति जन्म प्रमाण पत्र बनवाने और भर्ती मरीज के डिस्चार्ज होने की प्रक्रिया में भी करनी पड़ गई है। मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल में अगर इमरजेंसी सेवा दी जा रही है तो फोटोस्टेट की भी सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। मरीज या उनके घरवाले देर रात को अस्पताल से बाहर जाकर फोटोस्टेट कैसे करा पाएंगे। लोगों का कहना है कि अगर किसी प्रक्रिया में फोटोस्टेट कॉपी जमा करने का नियम है तो इसकी व्यवस्था भी अस्पताल प्रशासन को अपने स्तर पर करवाना चाहिए। एक तरफ तो कोरोना से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और कम से कम बाहर निकलने की बात कहीं जा रही है। वहीं दूसरी तरफ एक फोटोस्टेट कराने के लिए एक से डेढ़ किलोमीटर तक का चक्कर लगावाया जा रहा है। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कोरोना के कारण अस्पताल की ज्यादातर दुकानें बंद हो जाने से यह परेशानी हो रही है। स्थिति सामान्य होते ही अस्पताल की बंद बड़ी फोटोस्टेट की दुकान भी खुल जाएगी। इसके बाद इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
कोरोना के कारण अस्पताल की लगभग सभी दुकानें बंद हैं। अस्पताल के अंदर एक फोटो स्टेट की दुकान भी है। स्थिति सामान्य होते ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
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-डा. रवि गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमसीएच-32
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