चंडीगढ़ के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी अब मेडिकल कालेज के पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट पूरी करेंगे। पिछले हफ्ते नई दिल्ली में मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) की नवगठित बोर्ड आफ गवर्नर की पहली बैठक में डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंसी प्रोग्राम के प्रस्ताव को पास किया गया है। यह प्रोग्राम मेडिकल कालेज के पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट (एमडी की पढ़ाई करने वाले डाक्टरों) के पाठ्यक्रम में शामिल होगा।
इसके तहत तीन महीने उन्हें शहर के जिला अस्पताल में प्रैक्टिस करनी होगी। चंडीगढ़ में सेक्टर 16, 22, 45 और मनीमाजरा जिला अस्पताल की श्रेणी में आते हैं। मरीजों की संख्या के अनुपात के मुताबिक यहां पर डाक्टरों की बेहद कमी है। ये कमी अब डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंसी प्रोग्राम से दूर होगी। बीते हफ्ते नई दिल्ली में आयोजित बैठक की अध्यक्षता बोर्ड आफ गवर्नर के चेयरमैन डॉ. वीके पाल ने की।
बैठक में पेश किए एजेंडे के मुताबिक यह स्कीम सरकारी मेडिकल कालेज के अतिरिक्त प्राइवेट व डीम्ड यूनिवर्सिटी में भी लागू होगी। पीजी कोर्स का हिस्सा होने की वजह से प्राइवेट व डीम्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को भी तीन महीने की सेवाएं जिला अस्पताल में देनी होंगी। ट्रेनिंग पीरियड के दौरान उन्हें डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंट कहा जाएगा। इसमें सबसे महत्वपूर्ण क्लॉज यह है कि फाइनल एग्जाम में बैठने से पहले हर स्टूडेंट को संतुष्टि प्रमाण पत्र दिखाना होगा।
यह प्रमाण पत्र जिला अस्पताल के हेड या स्टेट गवर्नमेंट देगी। जिस स्टूडेंट्स के पास यह सर्टिफिकेट नहीं होगा, उसे एग्जाम में बैठने की इजाजत नहीं मिलेगी। विशेषज्ञों ने बताया कि रोटेशन प्रक्रिया के तहत एक के जाने के बाद दूसरे आने की नीति लागू रहने से एमडी स्टूडेंट की जगह खाली नहीं रहेगी। वह जगह स्थाई बनी रहेगी।