फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राज्य स्तरीय समागम में छलका शहीद परिवार का दर्द, सरकार पर लगाया उपेक्षा का आरोप

Thu, 13 Sep 2018 09:52 AM IST
अनिल कुमार, अमर उजाला, फिरोजपुर (पंजाब)
विज्ञापन
सारागढ़ी
विज्ञापन

 सारागढ़ी शहीदों के परिजनों आरोप है कि सेना के अधिकारी व नेता साल भर में एक बार सम्मानित कर देते हैं,  उसके बाद उनकी कोई सुध नहीं लेता है। पंजाब सरकार ने सारागढ़ी शहीद हवलदार ईशर सिंह की याद में अस्पताल बनाने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक अस्पताल नहीं बना है। कई शहीद के परिजनों को नौकरी तक नहीं दी गई है।

विज्ञापन


फिरोजपुर स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा सारागढ़ी में आयोजित समागम में उपस्थित शहीदों के परिजनों से जब बातचीत की गई तो सभी ने एक ही बात कही कि उन्हें आज तक किसी सेना के अधिकारी व नेता ने नहीं पूछा कि उनकी क्या समस्या है। सारागढ़ी शहीद हवलदार ईशर सिंह के पड़पोते संतोख सिंह ने कहा कि सिर्फ आर्मी ने उनके दादा की याद में गांव चौलड़ा जिला लुधियाना में स्मारक बनाई है और जब भी वह उनकी याद में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित करते हैं तो आर्मी मात्र सलामी दे देती है।

विज्ञापन

शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह
इसके अलावा उनकी कोई सुध नहीं ली जाती है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने ईशर सिंह की याद में एक अस्पताल बनाने की घोषणा की थी, जो अभी तक नहीं बनाया है। इसी तरह गुरदेव कौर निवासी गांव महतपुर जिला जालंधर मुताबिक उसके दादा नायक लाल सिंह ने देश की खातिर प्राण न्योछावर किए थे। बावजूद इसके सरकार ने उनके परिवार में न तो किसी को नौकरी दी, न ही कोई माली सहायता प्रदान की है। इसके अलावा लुधियाना से पहुंचे अवतार सिंह ने कहा कि उसके पड़नाना बाबा साहब सिंह सिख फौज में अफरीदी पठानों से लड़ते हुए शहीद हुए थे। 

सरकार हर साल उन्हें 12 सितंबर को बुलाकर मात्र लोई व तलवार देकर सम्मान किया जाता है। उन्होंने कई बार सरकार तक गुहार पहुंचार्ई कि उन्हें कोई सहायता प्रदान की जाएं, लेकिन किसी भी सरकार ने उनकी कोई सहायता नहीं की है। उन्होंने कहा कि खुद ही अपने गांव में शहीद की याद में एक मजार स्थापित करवाई है, जहां पर हर साल मेला लगाया जाता है।

इसी तरह गुरनेक सिंह निवासी चड़क जिला मोगा ने कहा कि उसके पड़दादा उतम सिंह वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनके पास मात्र घर के गुजारे लायक जमीन है, जिस पर मेहनत करके फसल लगाते और मेहनत की कमाई की रोटी खाते हैं। किसी भी सरकार ने उन्हें कोई नौकरी और कोई मदद नहीं की है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें