बसपा सुप्रीमों मायावती ने पार्टी वर्करों को एकला चलो का गुरुमंत्र देते हुए साफ किया कि बसपा अपने मिशन को आगे बढ़ाने के लिए आगे भी अकेले ही चुनाव लड़ेगी। दलित की बेटी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए पार्टी वर्करों को जातियों का गठबंधन बनाते हुए खुद को मजबूत बनाना होगा, न कि गठबंधन की बैसाखी को ढूंढना चाहिए। वह बुधवार को स्थानीय चंडीगढ़ रोड पर हुई पार्टी की रैली को संबोधित कर रही थीं।
गठबंधन का दबाव डाल रहे नेता
मायावती ने कहा कि पंजाब के कुछ नेता अक्सर उन पर गठबंधन का दबाव डालते रहते हैं। मगर ऐसे गठबंधनों का कभी बसपा को लाभ नहीं होता, क्योंकि बसपा का वोट तो दूसरी पार्टियों को ट्रांसफर हो जाता है, लेकिन गठबंधन वाले दल बसपा को वोट नहीं डलवा पाते। यही नहीं जो वोट बसपा दूसरे दलों को डलवाती है, वह भी गठबंधन टूटने की सूरत में उसे पचास प्रतिशत से अधिक वापिस नहीं मिलता। ऐसे में बसपा के मिशन को धक्का पहुंचता है। उन्होंने वर्करों से आह्वान किया कि दलितों व अन्य पिछड़ी जातियों का गठबंधन बनाएं, अल्पसंख्यक व अगड़ी जातियां खुद-ब-खुद उनके साथ जुड़ जाएंगी।
कार्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाती हैं पार्टियां
रैली के दौरान कांग्रेस, भाजपा व अन्य दलों को कोसते हुए उन्होंने कहा कि महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी आदि को खत्म करने में सभी दल नाकामयाब रहे हैं।
देश पर 50 साल तक कांग्रेस ने, छह साल भाजपा ने तथा पांच सालों तक अन्य पार्टियों ने शासन किया, लेकिन किसी ने भी बहुजन समाज के हितों का ध्यान नहीं रखा। यह पार्टियां बड़े-बड़े कार्पोरेट घरानों से चंदा लेकर अपनी पार्टियां चलाती हैं तथा बाद में इन्हीं घरानों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियां बनाती हैं।
विदेशी बैंकों में पड़ा है काला धन
मायावती ने कहा कि कार्पोरेट घरानों व बड़े बड़े नेताओं का कालाधन विदेशी बैंकों में पड़ा है, जिसे अभी तक वापिस नहीं लाया जा सका। उन्होंने कहा कि बसपा ने अपने यूपी के शासन के दौरान सर्वजन हिताए, सर्वजन सुखाए के वाक्य को पूरा कर दिखाया था।
अंत में उन्होंने पार्टी वर्करों को मीडिया रिपोर्टस पर विश्वास न करने व बसपा को अपने दम पर अधिक से अधिक सीटें जीताने का आह्वान किया। मौके पर पार्टी नेता नरिंदर कश्यप, प्रकाश भारती, प्रकाश जंडाली, नछत्तर पाल, केएस मक्खन व पार्टी के पंजाब से लोकसभा उम्मीदवार उपस्थित थे।