चंडीगढ़। टीएफटी फेस्ट के दूसरे चरण में आसाम के प्रसिद्ध पेंटर और मास्क मेकिंग की कला में निपुण सुजीत बरुआ ने वर्कशॉप के दूसरे दिन भी युवा रंगकर्मियों को मास्क मेकिंग के गुर सिखाए। 12 फरवरी तक चलने वाली इस वर्कशॉप में प्रतिभागियों को प्राकृतिक चीजों से मास्क बनाना सिखाया जाएगा। इसी वर्कशॉप में मास्क मेकिंग के बेसिक पर जानकारी देते हुए सुजीत ने मुखौटों को बनाने के लिए सही चीजों के चयन की तकनीक के बारे में बताया। इसमें बांस, मिट्टी और कपड़ा शामिल है। उन्होंने बताया कि उनकी स्थानीय भाषा में जाती बा बांस का उपयोग यदि मुखौटा बनाने की प्रक्रिया में किया जाए तो मुखोटे की उम्र 50 से 100 साल तक बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि उनकी कोशिश है कि इस वर्कशॉप में वह खुद मास्क बनाने की बजाय ज्यादा से ज्यादा युवाओं को मास्क मेकिंग की प्रक्रिया में बनाए रखना चाहते हैं। युवा रंग कर्मियों को खुद मास्क बनाने का कार्य देते हुए सुजीत ने बताया कि ज्यादातर मुखौटे पुराणों की कहानियों पर आधारित होते है और इनका इस्तेमाल पौराणिक नाटकों के मंचन में सबसे ज्यादा किया जाता है।