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MSME: उद्यमी समाज की गौरव हैं अंजू बजाज

Mon, 25 Jan 2016 06:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बहादुरगढ़ महिला उद्यमी अंजू बजाज प्रदेश के उद्यमियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। वह न सिर्फ बहादुरगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया में अपनी फैक्टरी और अपने घर को सफलतापूर्वक चला रही हैं बल्कि उद्यमियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने में भी पीछे नहीं रहतीं।
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उनकी औद्योगिक इकाई पीएनए इंडस्ट्रीज़ से फिलहाल परोक्ष-अपरोक्ष रूप से करीब 200 लोगों को रोजगार मिल रहा है। करीब 61 साल की अंजू न केवल आफिस और व्यापारिक कामकाज संभालती हैं, बल्कि फैक्टरी में हर तरह के तकनीकी कार्यों पर भी पैनी नजर रखती हैं।

उन्होंने दिल्ली के जीसस एंड मैरी कालेज से बीकॉम, उस्मानिया यूनिवर्सिटी से एमबीए, पीएचडी चैंबर आफ कामर्स से ईडीपी कोर्स और भारत सरकार के एसआईएसआई से एक्सपोर्ट प्रोमोशन कोर्स किया। अंजू बजाज को सन् 1999 में तत्कालीन वाणिज्य मंत्री रामकृष्ण हेगड़े ने उद्योग-पत्र अवार्ड से सम्मानित किया।
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वर्ष 2003 में केंद्रीय मंत्री तपन सिकदर ने महिला समाज में आउट स्टेंडिंग उपलब्धि के लिए उनका अभिनंदन किया उसी साल पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने आइएमएम अवार्ड फार एक्सीलेंस से नवाजा। उनकी पीवीसी कंडक्ट एंड एसेस्सरीज़ यूनिट को हरियाणा की सबसे पहली आईएसआई मार्क यूनिट का गौरव भी हासिल है।

अंजू बजाज बहादुरगढ़ के हजारों उद्यमियों के साथ उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने में पीछे नहीं रहती। बहादुरगढ़ की एकमात्र इंडस्ट्रियलिस्ट आर्गेनाइजेशन..बहादुरगढ़ चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज़ (बीसीसीआइ) की महासचिव रह चुकी हैं। पीएचडी चैंबर आफ कामर्स, लघु उद्योग भारती की आजीवन सदस्य और इंडियन प्लास्टिक इंस्टीट्यूट की सदस्य हैं।

महिला कल्याण के कार्यों में अंजू कभी पीछे नहीं रहती। उन्हें फेडरेशन ऑफ इंडिया वुमेन एंटरप्रिन्योर की ओर से इंटरनेशनल वुमैन अवार्ड मिल चुका है। अमेरिकन बायोग्राफिकल इंस्टीट्यूट के बोर्ड की सदस्या हैं। एशियन सोसायटी आफ वुमेन इंटरप्राइजिज फार मार्केटिंग की चेयरपर्सन और पीएचडीसीसीआई द्वारा गठित एमएसएमई टास्क फोर्स की को-चेयरपर्सन हैं।

राज्य सरकार उन्हें वुमैन-94 अवार्ड से सम्मानित कर चुकी हैं। पीएनए इंडस्ट्रीज़ को चलाने में पति विपिन बजाज उनका हर कदम पर साथ देते हैं। अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान 1967 से 1975 तक अंजू हाकी की प्रतिभाशाली खिलाड़ी रहीं। शुरू से अंत तक टीम की कप्तान रहीं। बेटियों अपराजिता और परिणीता को भी अपनी मां पर गर्व है।
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