आजकल लोगों की लाइफ स्टाइल पूरी तरह बदल गई है। ऐसे में घुटनों की तकलीफ, तो जैसे आम हो गई है। युवा भी इस बीमारी से ग्रस्त हो रहे हैं। अधिकतर पीड़ित लोग नी-रिप्लेसमेंट सर्जरी का चुनाव कर रहे हैं।
ऐसे में सर्जरी ‘वेरीलास्ट नी सिस्टम’ लोगों के लिए वरदान सिद्ध हो सकती है। वेरीलास्ट नी सिस्टम प्राकृतिक घुटने जैसा ही है। इसलिए स्थिरता और आराम बढ़ाता है।
यह सिस्टम ऐसे नौजवान मरीजों की जरूरतों को पूरा करता है, जो रोजमर्रा की जिंदगी में भागदौड़ करते रहते हैं। यह प्लांट तीस साल से भी ज्यादा चल सकता है।
यह जानकारी मैक्स सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के मैक्स इलीट इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स एंड ज्वाइंट रिप्लेसमेंट के डायरेक्टर और हेड डॉ. मनुज वाधवा ने यहां दी।
उन्होंने दावा किया कि इस तकनीक से वह भारत का पहला केस सुलझा चुके हैं। उन्होंने बताया कि सीधी टांग से मुड़े हुए घुटने तक के विस्तार में स्थिरता प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि वेरीलास्ट तकनीक ‘ओक्सिनियम’ एलॉय और एडवांस्ड क्रॉस-लिंक्ड पॉलीएथिलीन का यूनी मिश्रण है। यह दोनों मिलकर इस अप्राकृतिक घुटने को लगभग न के बराबर नुकसान होने देते हैं।
दोबारा सर्जरी कराने की बड़ी वजह है, घुटने का होने वाला घिसाव। इसमें काफी खर्च भी आता है। इसलिए इंप्लांट ऐसा चाहिए, जिसकी उम्र लंबी हो। कम घिसाव की वजह से इस दिक्कत को भी वेरीलास्ट तकनीक दूर करती है।