इसलिए पीपीपी मोड पर बनाने का हुआ फैसला
मैरिज पैलेस का खर्च करीब 76 करोड़ रुपये आ रहा है। मास्टर प्लान के कार्यान्वयन की बैठक में अधिकारियों ने पूछा था कि अगर नगर निगम या प्रशासन 76 करोड़ खर्च कर बनाए तो रिकवरी कितने वर्षों में होगी। मौजूदा दामों को जोड़ कर अधिकारियों ने बताया कि कि करीब 26 वर्ष में लगाया हुआ रुपया वापस आएगा इसलिए फैसला लिया गया कि इसे पीपीपी मोड पर ही बनाया जाएगा और जो भी कंपनी या एजेंसी मैरिज पैलेस को चलाएगी उसे लाभ का कुछ हिस्सा नगर निगम को भी देना होगा।
मैरिज पैलेस को लेकर चिंताएं भी हैं
पीपीपी मोड पर मैरिज पैलेस बनेगा तो कंपनी अपने फायदे को देखते हुए मार्केट रेट के आधार पर दाम को तय करेगी जो काफी ज्यादा हो सकता है। पार्षद जसबीर सिंह ने कहा कि जिस गांव में वह रहते हैं, उसकी आबादी करीब 10 हजार है और 95 फीसदी लोग गरीब हैं। वह ज्यादा रुपया नहीं दे पाएंगे। साथ ही लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी 10 बजे डीजे बंद हो जाएगा इसलिए लोग शादी के लिए फिर भी जीरपुर व अन्य जगह ही जाएंगे।
हमारे फाइनेंस एक्सपर्ट ने ज्वाइन कर लिया है। पीपीपी मोड पर मैरिज पैलेस बनाने के लिए स्टडी करने को कहा गया है। उनकी रिपोर्ट का इंतजार है, उसके बाद एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी कर दिया जाएगा। - आनिंदिता मित्रा, आयुक्त, नगर निगम।
ये पैसे की बर्बादी है। मौजूदा सामुदायिक केंद्र को ही मरम्मत कर या दोबारा तोड़कर बनाया जाना चाहिए। मेरे क्षेत्र में गरीब लोग रहते हैं, उन्हें कम्युनिटी सेंटर की जरूरत है, न कि पैलेस की। वो पैलेस का किराया नहीं दे पाएंगे। - जसबीर सिंह, स्थानीय पार्षद।