पिता जीते पुत्री हारी
इसी तरह से अंबाला सिटी से जीत हासिल करने वाले कांग्रेस के निर्मल चौधरी को अपनी जीत के साथ बेटी चित्रा की हार सहन करनी पड़ी। अंबाला कैंट से टिकट न मिलने पर चित्रा ने कांग्रेस से बगावत की थी और निर्दलीय चुनाव लड़ा था।
चाचा को जीत, भतीजे को हार
भजनलाल परिवार को भी जीत की खुशी के साथ हार का गम बर्दाश्त करना पड़ा है। भजनलाल के बड़े बेटे कुलदीप बिश्नोई के पुत्र भव्य अपनी परंपरागत सीट आदमपुर से भाजपा के प्रत्याशी थे। कांग्रेस के चंद्रप्रकाश ने हराया दिया। 56 साल में पहली बार आदमपुर में भजनलाल परिवार हारा है। वहीं, भव्य के चाचा चंद्रमोहन ने दस साल बाद पंचकूला सीट से जीत हासिल की है। देवीलाल के पौत्र अभय चौटाला को बेटे अर्जुन की रानियां सीट से जीत की खुशी होगी तो अपने गढ़ ऐलनाबाद को कांग्रेस के हाथों गंवाने का गम भी होगा। देवीलाल परिवार के छह सदस्यों को इस बार हार का सामना करना पड़ा है।
अपने ही अपनों के खिलाफ
राजनीति किस कदर रिश्तों में दरार डालती यह भी इस बार हरियाणा के चुनाव में देखने को मिला। इस बार कई सीटों पर अपने ही अपनों के खिलाफ चुनावी ताल ठोकते नजर आए। फरीदाबाद जिले की बल्लभगढ़ सीट पर दादा और पोती के बीच मुकाबला हुआ। भाजपा प्रत्याशी मूलचंद शर्मा के खिलाफ कांग्रेस से पराग शर्मा ने पर्चा भरा था। पराग के पिता और पूर्व विधायक योगेश शर्मा मूलचंद शर्मा के चचेरे भतीजे हैं। इस सियासी लड़ाई में दादा का अनुभव भारी पड़ा और जीत हासिल की।
अटेली सीट पर भी ससुर और बहू के बीच लड़ाई देखने को मिली। इनेलो-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी ठाकुर अत्तर लाल के खिलाफ उनकी बहू साधना निर्दलीय चुनाव लड़ रहीं थीं। हालांकि यहां से जीत भाजपा की आरती राव ने हासिल की। तोशाम सीट पर बंसीलाल परिवार और डबवाली सीट पर चौटाला परिवार में जंग तो जगजाहिर है। तोशाम में चचेरे बहन-भाई श्रुति और अनिरुद्ध आमने-सामने थे तो डबवाली में चौटाला परिवार के तीन सदस्य एक दूसरे के खिलाफ खड़े थे। रानियां सीट पर भी अभय के बेटे अर्जुन चौटाला ने दादा रणजीत चौटाला को हरा दिया।