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Haryana Election: राजनीति की कसाैटी पर कसे गए थे रिश्ते... कोई जीता तो किसी को मिली शिकस्त

Thu, 10 Oct 2024 11:51 AM IST
निवेदिता वर्मा गाैरव त्रिपाठी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हरियाणा विधानसभा चुनाव में इस बार कई रिश्तेदार उतरे थे। इनमें से कई जीते तो कई हारे। परिवारों में भी गम और खुशी दोनों का माहाैल है। 
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हरियाणा विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा विधानसभा चुनाव की चौसर में इस बार रिश्तों की ऐसी बिसात बिछी कि किसी को शह तो किसी को मात मिली। इस बार चुनाव परिणाम आने के बाद एक ही घर में जीत की खुशी के साथ हार का गम भी पहुंचा है। तो कई सीटों पर अपने ही अपनों की हार का कारण बने हैं। रिश्तों का ऐसा द्वंद्व शायद ही हरियाणा की राजनीति में पहले देखने को मिला हो।

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समधन जीती, समधी हारे

इस बार चुनाव में समधी को हार का सामना करना पड़ा है तो समधन को जीत की खुशी मिली है। दरअसल कालका सीट से भाजपा के टिकट पर जीत हासिल करने वालीं शक्ति रानी शर्मा के बेटे और राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा की शादी गन्नौर से कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप शर्मा की बेटी ऐश्वर्या से हुई है। पूर्व मंत्री विनोद शर्मा के घर में उनकी पत्नी शक्ति रानी की जीत की खुशी पहुंची तो बहू को पिता की हार का गम भी सहना पड़ा।

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पिता जीते पुत्री हारी

इसी तरह से अंबाला सिटी से जीत हासिल करने वाले कांग्रेस के निर्मल चौधरी को अपनी जीत के साथ बेटी चित्रा की हार सहन करनी पड़ी। अंबाला कैंट से टिकट न मिलने पर चित्रा ने कांग्रेस से बगावत की थी और निर्दलीय चुनाव लड़ा था।

चाचा को जीत, भतीजे को हार

भजनलाल परिवार को भी जीत की खुशी के साथ हार का गम बर्दाश्त करना पड़ा है। भजनलाल के बड़े बेटे कुलदीप बिश्नोई के पुत्र भव्य अपनी परंपरागत सीट आदमपुर से भाजपा के प्रत्याशी थे। कांग्रेस के चंद्रप्रकाश ने हराया दिया। 56 साल में पहली बार आदमपुर में भजनलाल परिवार हारा है। वहीं, भव्य के चाचा चंद्रमोहन ने दस साल बाद पंचकूला सीट से जीत हासिल की है। देवीलाल के पौत्र अभय चौटाला को बेटे अर्जुन की रानियां सीट से जीत की खुशी होगी तो अपने गढ़ ऐलनाबाद को कांग्रेस के हाथों गंवाने का गम भी होगा। देवीलाल परिवार के छह सदस्यों को इस बार हार का सामना करना पड़ा है।
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अपने ही अपनों के खिलाफ

राजनीति किस कदर रिश्तों में दरार डालती यह भी इस बार हरियाणा के चुनाव में देखने को मिला। इस बार कई सीटों पर अपने ही अपनों के खिलाफ चुनावी ताल ठोकते नजर आए। फरीदाबाद जिले की बल्लभगढ़ सीट पर दादा और पोती के बीच मुकाबला हुआ। भाजपा प्रत्याशी मूलचंद शर्मा के खिलाफ कांग्रेस से पराग शर्मा ने पर्चा भरा था। पराग के पिता और पूर्व विधायक योगेश शर्मा मूलचंद शर्मा के चचेरे भतीजे हैं। इस सियासी लड़ाई में दादा का अनुभव भारी पड़ा और जीत हासिल की।

अटेली सीट पर भी ससुर और बहू के बीच लड़ाई देखने को मिली। इनेलो-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी ठाकुर अत्तर लाल के खिलाफ उनकी बहू साधना निर्दलीय चुनाव लड़ रहीं थीं। हालांकि यहां से जीत भाजपा की आरती राव ने हासिल की। तोशाम सीट पर बंसीलाल परिवार और डबवाली सीट पर चौटाला परिवार में जंग तो जगजाहिर है। तोशाम में चचेरे बहन-भाई श्रुति और अनिरुद्ध आमने-सामने थे तो डबवाली में चौटाला परिवार के तीन सदस्य एक दूसरे के खिलाफ खड़े थे। रानियां सीट पर भी अभय के बेटे अर्जुन चौटाला ने दादा रणजीत चौटाला को हरा दिया।

 
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