लोकसभा चुनाव सिर पर हैं और 2019 के मुकाबले इस बार पंजाब की राजनीति की बिसात काफी दिलचस्प है। 2019 के बाद कई नेताओं ने दल भी बदला और साथ ही उनके सुर भी बदल गए।
पिछले चुनाव में जाखड़ ने संभाली थी कांग्रेस की कमान, अब हाथ में भाजपा की पतवार
2019 में सुनील जाखड़ पीपीसीसी के प्रधान थे और चार साल तक लगातार प्रधान रहे। उनकी प्रधानगी में पंजाब में कांग्रेस ने आठ सीट जीती थीं, लेकिन इस बार जाखड़ भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष हैं। उनकी प्रधानगी में भाजपा चुनाव लड़ रही है। 2019 में जाखड़ आरएसएस व भाजपा पर जमकर प्रहार करते थे। वहीं, अब उनके सुर बदल गए हैं। अब वह कांग्रेस पर प्रहार कर रहे हैं। 2024 में उनके निशाने पर अब कांग्रेस व आम आदमी पार्टी है। किसान आंदोलन के मुद्दे पर मुखर रहे जाखड़ अब केंद्रीय नीतियों का फायदा बताते नजर आते हैं। कई संवेदनशील मुद्दों पर वह चुप्पी साध लेते हैं। भाजपा में सबको साथ लेकर चलना उनके लिए चुनौती साबित हो रहा है।
कैप्टन ने भी बदला पाला, बेटी के बाद पत्नी भी बनेंगी भाजपा का हिस्सा
पंजाब के दो बार मुख्यमंत्री व 2019 में पंजाब में लोकसभा चुनाव में प्रचार संभालने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह अब भाजपा में हैं। उनकी बेटी बीबी जयइंद्र कौर भाजपा की महिला मोर्चा प्रधान है, जबकि पत्नी परनीत कौर कांग्रेस से सांसद हैं, लेकिन वह भाजपा का हिस्सा बनने जा रही हैं। वह अकसर भाजपा के कार्यक्रमों में दिखती हैं। कभी केंद्र की भाजपा सरकार को निशाने पर लेने वाले कैप्टन भी अब भाजपा का गुणगान करते दिखाई देते हैं। इस बार कैप्टन के निशाने पर आप व कांग्रेस ही हैं। उनकी बेटी जयइंद्र कौर भी आक्रामक तरीके से प्रचार कर रहीं हैं। परनीत कौर किसी भी समय भाजपा में शामिल हो सकती हैं। उन्हें टिकट मिलने के पूरे आसार हैं।
बोनी अजनाला भाजपा ओबीसी के चेयरमैन, सुखबीर से नाराजगी
बोनी अजनाला सांसद रत्न सिंह अजनाला के बेटे हैं। वह शिरोमणि अकाली दल से विधायक रह चुके हैं, लेकिन इस बार वह भाजपा के लिए वोट मांगेंगे। वह भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रधान हैं। उन्होंने हाल ही में अकाली दल छोड़ा था। वह अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल से नाराज चल रहे थे। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अकाली दल के पूर्व विधायक को पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। बिक्रम सिंह मजीठिया के साथ अनबन के बीच अजनाला ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
सुखबीर को कोसने वाले ढींडसा व बीबी जगीर कौर दिखेंगे एक मंच पर
शिरोमणि अकाली दल में सुखदेव सिंह ढींडसा, परमिंदर सिंह ढींडसा व बीबी जागीर कौर की वापसी हो गई है। यह नेता अकाली दल से खासे नाराज थे और सुखबीर बादल की लीडरशिप पर सवाल खड़ा कर रहे थे। हर बार सुखबीर बादल को बेअदबी व अन्य मामलों में घेर रहे थे, लेकिन अब 2024 में यह नेता सुखबीर की लीडरशिप में प्रचार करेंगे और उसकी तारीफों के पुल भी बांधेंगे। बीबी ने तो एसजीपीसी चुनाव में खुली बगावत कर दी थी और चुनाव भी लड़ा था। हालांकि वह जीत नहीं पाईं। वहीं, ढींडसा भी खासे नाराज थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
राणा गुरजीत सिंह के खास रिंकू आप के सांसद, अब कांग्रेस को घेरेंगे
जालंधर से आप सांसद सुशील रिंकू आप के एकमात्र लोकसभा सदस्य हैं। पिछले साल उपचुनाव में उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कहकर आप से उपचुनाव लड़ा था। रिंकू कांग्रेसी विधायक राणा गुरजीत सिंह के निकटवर्ती हैं। 2019 में रिंकू चौधरी संतोख सिंह कांग्रेस के लिए वोट मांगते थे, लेकिन 2024 में वह आप के लिए वोट मांगेंगे और उनके निशाने पर कांग्रेस ही रहेगी। उन्होंने उपचुनाव से ठीक पहले पाला बदल लिया था।
अंगुराल ने 2019 में भाजपा के लिए मांगे वोट, अब आप के लिए प्रचार
विधायक शीतल अंगुराल पहले भाजपा में थे। 2019 में शीतल अंगुराल ने भाजपा-अकाली दल के उम्मीदवार चरणजीत सिंह अटवाल को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंकी थी। 2022 में शीतल भाजपा को अलविदा कहकर आप में आ गए। आप की तरफ से विधायक बन गए।
कांग्रेस के राणा सोढ़ी, फतेहजंग बाजवा, ढिल्लों अब भाजपा के चेहरे
2019 में कांग्रेस के लिए गली गली वोट मांगने और केंद्र की सरकार को कोसने वाले पूर्व विधायक फतेहजंग बाजवा, हरविंदर सिंह लाडी, तत्कालीन मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी, केवल सिंह ढिल्लों इस बार कांग्रेस नहीं, बल्कि भाजपा के लिए वोट मांगेंगे। जहां पिछली बार वह केंद्र सरकार को कोस रहे थे, इस बार वह केंद्र सरकार की तारीफ कर रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व विधायक जीपी भी आप में आ गए हैं और इस बार वह आप के उम्मीदवार बनने जा रहे हैं।
खैहरा ने वड़िंग के खिलाफ लड़ा था चुनाव, इस बार कांग्रेस के साथ
सुखपाल खैहरा इस बार कांग्रेस के सिपाही हैं। वह भुलत्थ से विधायक हैं। पिछली बार 2019 में उन्होंने पंजाब एकता पार्टी बनाकर हरसिमरत कौर बादल और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ बठिंडा से चुनाव लड़ा था। वहां पर कांग्रेस के प्रत्याशी की हार का मुख्य कारण बने थे, लेकिन इस बार खैहरा कांग्रेस के विधायक हैं।