चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एरिया फेस एक के संजय लेबर कॉलोनी में कई बच्चों को उनका शिक्षा का अधिकार नहीं मिल पा रहा है। कई बच्चे ऐसे हैं जिनके भाई-बहन तो पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन उनका स्कूल में दाखिला नहीं हुआ है।
स्कूल से नाम काट दिया है, अब स्कूल आने की कोई जरूरत नहीं। सेक्टर 28 स्थित गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल के एक शिक्षक ने खुशी की मां पुष्पा से यह बात कही। दो महीने से बिन बताए स्कूल न जाने पर नौ वर्षीय खुशी का नाम स्कूल से काट दिया गया। जब पुष्पा ने शिक्षक से बेटी को पढ़ाने के लिए मिन्नत की तो जवाब मिला कि वह पढ़ने में कमजोर है और आगे पुष्पा की कोई बात नहीं सुनी। हैरानी की बात यह है कि खुशी की बहन का नाम स्कूल से नहीं काटा गया, जबकि वह भी उतने ही समय के लिए स्कूल नहीं गई थी।
नवंबर 2022 से थी अनुपस्थित
सेक्टर 28 के गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल की हेडमिस्ट्रैस सुनीता सेठी ने बताया क्लास इंचार्ज से मिली जानकारी के अनुसार तीसरी कक्षा में पढ़ रही खुशी नवंबर 2022 से स्कूल नहीं आई और उसने परीक्षा भी नहीं दी। इस वजह से नाम काट दिया। बाकी की जानकारी स्कूल जाकर पुष्टित की जाएगी।
सारी सीट भरी हुई है, दाखिला नहीं हो सकता
फैक्ट्री में काम करते लेबर कॉलोनी निवासी परमेश माझी ने बताया कि उनके चार बच्चों में से दो स्कूल जाते हैं और दो नहीं जाते। महीने का आठ-दस हजार कमाने वाले परमेश ने बताया कि छह वर्षीय बेटे का दाखिला करने के लिए वह सेक्टर 28 के सरकारी स्कूल गए तो उन्हें सीट पूरी हो चुकी है कहकर दाखिले से इनकार कर दिया। उन्हें किसी अन्य स्कूल में दाखिला लेने के लिए कहा गया पर वहां भी बच्चे को दाखिला नहीं मिला। चार-पांच बार स्कूल के चक्कर लगाकर भी जब दाखिला नहीं हुआ तो अशिक्षित परमेश ने बेटे को पढ़ाने की आस ही छोड़ दी।
परमेश, पुष्पा की तरह संजय कॉलोनी में कई अभिभावक हैं जो पढ़े-लिखे नहीं और उनके बच्चे भी इसी राह पर है। जागरूकता की कमी, स्कूल प्रशासन का दाखिले के लिए सहयोग न करना, दस्तावेज पूरे न होने की वजह से इन बच्चों का बचपन शिक्षा के अंधकार में गुजर रहा है। दस्तावेज न होने पर बच्चों का स्कूल में प्रोविजनल दाखिला किया जाता है और उन्हें दस्तावेज पूरे करने के लिए समय दिया जाता है। लेकिन कई बार अभिभावकों को दस्तावेज की कमी में सीधा दाखिले से ही मना कर दिया जाता है।
मामले की होगी जांच
चंडीगढ़ के स्कूलों में डेढ़ लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। इस तरह का कोई मामला मेरे सामने नहीं आया है जहां इस तरह से बच्चे का नाम काट दिया हो। अगर ऐसा हुआ है तो यह गलत है। मामले की जांच की जाएगी। - हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़, स्कूल शिक्षा निदेशक