हरियाणा में पहली बार विधायक बनकर सत्ता के शीर्ष पद पर बैठने जा रहे मनोहर लाल खट्टर के राजतिलक के साथ ही उनकी कार्यकुशलता की परीक्षा शुरू हो जाएगी। संगठन के तौर पर बढि़या काम करने वाले खट्टर को अब हरियाणा की सरकार और अफसरशाही से काम लेना होगा।
नई सरकार के सामने कई चुनौतियां होंगी। सबसे बड़ी चुनौती जाट और गैर जाट के बीच सामंजस्य बनाना होगी। हरियाणा की सत्ता अधिकतर समय जाटों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। राज्य में इस समय करीब 25 फीसदी जाट हैं। हालांकि जाट बहुल क्षेत्रों में भी भाजपा को वोट मिले हैं, लेकिन कांग्रेस और इनेलो के पक्ष में जाटों के अधिक वोट गए हैं।
हरियाणा में 18 साल बाद कोई गैर जाट मुख्यमंत्री बनेगा। इससे पहले भजनलाल ने गैर जाट मुख्यमंत्री के तौर पर हरियाणा की सत्ता संभाली थी। उस समय कांग्रेस में जाट नेताओं की खासी भागीदारी थी। भाजपा से सात जाट नेता जनता ने चुनकर विधानसभा में भेजे हैं। अभी तक हरियाणा में भाजपा का काडर भी गैर जाट रहा है।
हरियाणा के जाट अपने को अलग न महसूस करें, यह मुद्दा अहम होगा। किसानों के भले की बात करने वाली भाजपा किसानों को लाभ देकर जाटों को पार्टी से जोड़ने का काम कर सकती है।