हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय।
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हरियाणा के नए राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय की नियुक्ति बेहद अहम समय में हुई है। प्रदेश लंबे समय से किसान आंदोलन से जूझ रहा है। किसानों और गठबंधन सरकार के बीच टकराव चरम पर है। एसवाईएल, नशाखोरी, नशा तस्करी, बढ़ते अपराध और विपक्ष के पक्षपात के आरोप उनके सामने बड़ी चुनौती हैं।
राज्यपाल बदलने के साथ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के अलावा इनेलो को भी उम्मीद जगी होगी कि उनका पक्ष अच्छे से सुना जाएगा। हिमाचल प्रदेश शांत राज्य है, उसकी तुलना में दत्तात्रेय के सामने हरियाणा में अनेक चुनौतियां हैं। एक तरफ गठबंधन सरकार की गांठ और मजबूत करनी है तो दूसरी तरफ विपक्ष की उम्मीदों पर भी खरा उतरना है। पूर्व राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य पर विपक्ष, राजनीतिक और सामाजिक संगठन पक्षपात के आरोप लगाते रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा को किसान आंदोलन के मुद्दे पर मिलने का समय न देने से आरोपों को और बल मिला।
15 जुलाई को शपथ ग्रहण के बाद दत्तात्रेय को पक्षपात के दाग धोने का काम भी करना होगा। बंडारू राज्यपाल बनने से पहले बेबाक और भाजपा के खांटी नेता के रूप में जाने जाते रहे हैं। ऐसे में किसानों और भाजपा नेताओं के बीच हरियाणा में बने टकराव के हालात को खत्म कराने के लिए उनसे सांविधानिक रास्ता निकालने की उम्मीदें हैं।
एसवाईएल का मुद्दा भी हर चुनाव में गरमाता है। पंजाब में अगले साल चुनाव हैं, ऐसे में यह फिर उछलेगा। हरियाणा अपने हिस्से के पानी को लेकर लगातार दबाव बनाए हुए है। इसमें राज्यपाल की भूमिका किस तरह की रहेगी, इस पर नजरें टिकी रहेंगी। प्रदेश में नशाखोरी, नशा तस्करी के साथ बढ़ते अपराध को काबू कराना भी चुनौतीपूर्ण है। अंतरराज्यीय मुद्दों पर स्पष्ट रुख के साथ वह अपनी बात रखते रहे हैं, इसलिए पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के विवादास्पद मुद्दों को सुलझाने में उनकी भूमिका अहम रहने वाली है। कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए रेडक्रास व अन्य संस्थाओं को सक्रिय करने के लिए राज्यपाल की तरफ से उठाए जाने वाले कदमों पर भी सबकी निगाहें रहेंगी।
त्रिपुरा से हो गया हरियाणा का खास नाता
त्रिपुरा के साथ हरियाणा का अब खास नाता हो गया है। प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व प्रदेशाध्यक्ष चौधरी सुलतान सिंह त्रिपुरा के राज्यपाल रह चुके हैं। उनके बाद हरियाणा के तत्कालीन राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही बदलकर त्रिपुरा भेजा गया। उनके बाद अब निवर्तमान राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य भी कार्यकाल पूरा होने से पहले ही त्रिपुरा भेज दिए गए।