आज की उपलब्धता के मुताबिक मांगा पानी
1920 से 1960 तक पिछले 40 साल के एवरेज को निकाल कर 1981 में यह तय किया गया था कि 17.07 मिलियन एकड़ फुट पानी पंजाब हरियाणा को देगा लेकिन अब पानी कम हो चुका है, लिहाजा हरियाणा ने आज की उपलब्धता के मुताबिक 12.06 मिलियन एकड़ फुट पानी मांगा है।
देवेंद्र सिंह की बात पर कृष्ण कुमार ने पेश किए आंकड़े
बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री के सलाहकार, सिंचाई देवेंद्र सिंह ने बात रखी कि एसवाईएल बनाना क्यों जरूरी है? उन्होंने कहा कि प्रो रेट्रा बेस पर पंजाब और हरियाणा दोनों ने 1981 का एग्रीमेंट साइन किया था। इस लिहाज से 21 प्रतिशत पानी हरियाणा को मिलना चाहिए। उनकी बात पर पंजाब से सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव कृष्ण कुमार ने पानी की कमी के आंकड़े पेश करते हुए इन्कार कर दिया।
हांसी बुटाना पर भी हुई बात, नतीजा शून्य
बैठक में एक बार तो बातचीत की दिशा एसवाईएल से हटकर हांसी बुटाना पर पहुंच गई। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि शाहबाद और पेहोवा के बीच में हांसी बुटाना का काम बंद पड़ा है। इसके निर्माण पर भी पंजाब को आपत्ति है, कोर्ट में केस है। इससे पहले कि भगवंत मान कुछ बोलें पंजाब के अधिकारियों ने उन्हें कानूनी दांव पेंच बताकर अपनी असमर्थता जाहिर कर दी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर अमल के लिए बैठे
हरियाणा सरकार ने कहा कि आज हम लोग इसलिए बैठे हैं कि सुप्रीम कोर्ट के 2002 के निर्णय पर अमल कैसे करना है, यह तय किया जाए। पानी कितना आएगा यह तो ट्रिब्यूनल तय करेगा। अभी भाखड़ा नहर का कुछ पानी हरियाणा को मिल रहा है। हम पूरे हरियाणा में एसवाईएल के माध्यम से यह पानी चाहते हैं। बरसात के दौरान पंजाब में भी बाढ़ आती है, पानी पाकिस्तान चला जाता है लेकिन हरियाणा को नहीं मिलता।