चंडीगढ़। पंजाब कला भवन के ओपन थिएटर में चल रहे टीएफटी फेस्टिवल के दूसरे दिन रविवार को नाटक ‘चिड़ियाघर’ का मंचन हुआ। यह नाटक जालंधर के युवा थिएटर की ओर से पेश किया गया। नाटक की कहानी लेखन और निर्देशन अंकुर शर्मा ने किया है। कहानी में आधुनिक युग में इंसानों के दोगलेपन और आपस में बढ़ते अलगाव को दिखाया गया है।
नाटक में महानगर मे रहने वाले दो नागरिकों की कहानी को दिखाया है, जिनकी मुलाकात अचानक ही शहर के रिहायशी इलाके में स्थित एक पार्क में होती है। प्रकाश एक अच्छे पद पर कार्यरत है। वह दो बच्चियों का पिता तथा आर्थिक व सामाजिक रूप से स्थिर और सुरक्षित है। दूसरी तरफ जय नाम व्यक्ति बेरोजगार होने के साथ-साथ अकेला और आर्थिक रूप से अस्थिर है। जय जीवन के उन अस्तित्व वादी प्रश्नों से जूझ रहा है, जिनके बारे में सोचने की प्रकाश को फुर्सत नहीं है। दोनों किरदारों के मध्य जबरदस्ती शुरू हुआ वार्तालाप दोनों की जरूरतों और अभावों को व्यक्त करता है, लेकिन चर्चा अचानक एक बेंच के लिए द्वंद में परिवर्तित हो जाती है। इस दौरान लोगों के मध्य सामाजिक दूरी और हीन भावना को कलाकारों ने डॉयलाग के माध्यम से पेश किया। कुल मिलाकर इस नाटक में दिखाया कि आजकल इंसान दोगेलपन में तो जी ही रहा, साथ ही आपस में अलगाव भी बढ़ता जा रहा है। नाटक में विशेष अरोड़ा और सर्वप्रीत सिंह ने अभिनय किया। लाइट ऋषि चीमा, संगीत अभिषेक, मंच सज्जा जीवन डोगरा और रूहानिका ने संभाली।