पंजाब सचिवालय के एक चपरासी की होशियारी से उसकी चोरी हुई कार मिल गई और उसने उसे व चोरों को खुद ही तलाश लिया। दरअसल, मौलीजागरां स्थित घर के पास से सेंट्रो कार चोरी होने के बाद जब उसने पुरानी कार खरीदनी चाही तो उसे ओएलएक्स पर चोरी हुई अपनी ही कार दिख गई। उसने तुरंत पुलिस से संपर्क किया लेकिन पुलिस का रुख ढीला नजर आया। यह देख वह खुद नोएडा पहुंचा और लोकल पुलिस को सूचित कर कार चोरी करने के दो आरोपियों को दबोचकर पुलिस के हवाले कर दिया।
वहीं, मौलीजागरां पुलिस सिर्फ डीडीआर दर्जकर केस में पल्ला झड़ती रही। घटना बीते 8 सितंबर की है। पीड़ित हरदीप सिंह (26) ने बताया कि वह मौलीजागरां के लाला वाला पीर स्थित मकान नंबर-46 में परिवार समेत रहता है और पंजाब सचिवालय में बतौर चपरासी काम करता है। बीते 7 सितंबर को उसकी सेंट्रो कार घर के बाहर खड़ी थी। अगली सुबह करीब 11 बजे देखा तो कार चोरी हो गई थी। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम के अलावा मौलीजागरां थाना पुलिस को दी।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने डीडीआर दर्ज किया। इसके बाद अगले दो दिनों तक वह थाने का चक्कर काटता रहा लेकिन कार का कुछ पता नहीं चल सका। 11 सितंबर की रात करीब 7.45 बजे उसके मोबाइल पर गाजियाबाद के दुहाई टोल प्लाजा से फास्टैग का 50 रुपये कटने का मैसेज आया। इससे पता चला कि उसकी कार गाजियाबाद की ओर गुजरी है। शिकायतकर्ता ने बताया कि बिना किसी देरी के वह भागकर थाने पहुंचा कि उसकी पुलिस उसकी मदद करेगी।
आरोप है कि फास्टैग का मैसेज दिखाने के बावजूद पुलिस का रवैया ढीला नजर आया। कहने के बावजूद उन्होंने एक बार भी टोल प्लाजा या फिर वहां के स्थानीय पुलिस से संपर्क नहीं साधा। इसके अगले दिन हरदीप के पिता दर्शन सिंह दुहाई टोल प्लाजा पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज को निकलवाने की कोशिश की लेकिन कैमरा खराब होने के चलते कार का कुछ नहीं पता चल सका।