चंडीगढ़ में मलेरिया की दस्तक हो चुकी है। एक महीने के भीतर नौ केस दर्ज किए गए हैं। विभाग की ओर से मलेरिया को रोकने के लिए कदम उठाए जाने शुरू कर दिए गए हैं। मलेरिया विभाग का कहना है कि नौ में से तीन केस चंडीगढ़ के हैं। एक सेक्टर 22, दूसरा बुड़ैल व तीसरा मौली जांगरा का है, जबकि बाकी छह केसों की हिस्ट्री बाहर के प्रदेशों से है।
यानि वे बीमार बाहर के प्रदेशों में हुए थे, लेकिन उनके मलेरिया की पुष्टि चंडीगढ़ में हुई। ये लोग उत्तराखंड, यूपी और पंजाब के रहने वाले हैं। विभाग का कहना है कि मलेरिया को रोकने के लिए ग्राउंड स्तर पर काम तेजी से चल रहा है। करीब 600 से ज्यादा स्थायी ब्रीडिंग प्वाइंट हैं, जिन पर नजर रखी जा रही है।
लारवा से मच्छर जल्दी बन रहे हैं
एंटी मलेरिया अधिकारी डा. गौरव अग्रवाल ने बताया कि मौसम में बार-बार आ रहे बदलाव से लावरा से मच्छरों में ट्रांसमिशन जल्दी होने लगा है। पहले लारवा से एडल्ट मच्छर बनने में 10-12 दिन का समय लगता था, लेकिन अब देखने में आ रहा है कि छह से सात दिन में एडल्ट मच्छर बन जा रहे हैं। उनके मुताबिक दिन में तापमान अधिक रहता है और रात में तापमान गिर जाता है, जो मच्छरों के लिए अनुकूल परिस्थिति है। इस बात को ध्यान में रखते हुए जो कदम जून-जुलाई में उठाए जाने थे, उसे मई में ही शुरू कर दिया गया है, ताकि मलेरिया के केसों को रोका जा सके।
शहर को तीन जोन में बांटा
मलेरिया विभाग ने शहर को तीन जोन में बांटा है। हाई रिस्क जोन में मनीमाजरा, सेक्टर 45, धनास, हल्लोमाजरा, इंडस्ट्रियल एरिया, रामदरबार, डड्डूमाजरा, मलोया व इंदिरा कालोनी का कुछ हिस्सा है, जबकि लो रिस्क एरिया में सेक्टर 45 सहित अन्य एरिया शामिल है। विभाग के मुताबिक जो हाई रिस्क एरिया है, उन्हें सर्विलांस पर रखा गया है। साल 2015 में मलेरिया के कुल 152 केस रिपोर्ट किए गए थे। शहर में मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम भी शुरू किया गया है, जिसका मकसद जीरो मलेरिया करना है।
ऐसे करें मलेरिया से बचाव
1.घर के आस-पास व छतों पर पानी न जमा होने दें।
2.घर के बर्तन, होदिया व कूलरों को सप्ताह में एक बार सुखा कर दोबारा प्रयोग में लाएं।
3.घरों के आसपास गड्डों को मिट्टी से भर दें, ताकि पानी न जमा हो।
4. कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है, तुरंत सरकारी अस्पताल में संपर्क करें।