गोबर के दीये, सुनकर हैरानी हो रही हैं, लेकिन ये बन रहे हैं और ये खूबसूरत दीये इस बार आपकी दिवाली को ईको फ्रेंडली बनाने वाले हैं। जी हां, इसी मकसद से शहर की गौशाला गौरीशंकर सेवादल सेक्टर-45 के प्रबंधन एवं सेवकों की ओर से ये दीये बनाए जा रहे हैं। गौशाला प्रबंधकों का कहना है कि दिवाली पर शहर की हवा दूषित होती हैं, इसी से निजात के लिए गोबर के उपलों से दीये बनाए जा रहे हैं। गौशाला प्रबंधक रमेश शर्मा निक्कू ने बताया कि हमारे बुजुर्गों की ओर से पहले जमाने में यह प्रयास किया जाता था। गोबर के दीये जलाने से वातावरण भी दूषित नहीं होगा।
सकारात्मक ऊर्जा देंगे दीये
गौशाला प्रबंधक ने बताया कि इन दीयों को बनाने का मकसद लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करना है, क्योंकि ये दीये गोबर एवं हवन सामग्री के मिश्रण से बनाएं जा रहे हैं। हवन की सामग्री से जैसे सकारात्मक ऊर्जा आती है, वैसे ही इन दीयों को दिवाली पर जलाने से आपके आंगन में सकारात्मक ऊर्जा आएगी।
दिवाली पर गिफ्ट देंगे दीये
सेवक सचिन ने बताया कि यह दीये दिवाली पर सेक्टर निवासी एवं अन्य लोगों को तोहफे में दिए जाएंगे, ताकि हर घर आंगन में मां लक्ष्मी का स्वागत इनसे हो। उन्होंने बताया कि गोबर के दीये वातावरण को दूषित नहीं करते हैं। इसलिए शहर के लोगों को दिवाली पर कैंडल या मिट्टी के दीयों की बजाय इनको जलाना चाहिए। गौशाला में इन दिनों अधिक से अधिक दीये बनाने में सेवक जुटे हैं।
हजारों दीये बनाने का है लक्ष्य
गौशाला प्रबंधक रमेश ने बताया कि सेवकों की ओर से ज्यादा से ज्यादा दीये बनाए जा रहे हैं, ताकि ये लोगों मेें बांटे जा सकें। उन्होंने बताया कि दिवाली पर हजारों की संख्या में दीये बनाने का लक्ष्य है।
सेक्टर-45 में सात साल पहले बनीं गौशाला
गौरी शंकर सेवादल सेक्टर-45 गौशाला सात साल पहले बनाई गई थी। यहां 900 गाय हैं। गौशाला में गाय की देखरेख प्रबंधन एवं सेवकों की ओर से की जा रही है।