अब अगर किसी भी व्यक्ति को अपने भवन का नक्शा पास करवाना है तो उसे दो बेहद खास शर्तों को मानना होगा। मानना ही नहीं उसे इस बात का शपथ पत्र देना होगा कि वे हर हालत में इन शर्तों की पालना करेगा, अन्यथा उसके खिलाफ जो कार्रवाई होती है, तो उसकी जिम्मेवारी उसकी खुद की होगी।
इसमें से पहली शर्त यह रहेगी कि भवन निर्माण का नक्शा पास करवाने वाला आवेदन अपने वाहन को अपने घर के भीतर ही खड़ा करेगा। जबकि दूसरी शर्त यह रहेगी कि आवेदन को अपने घर के टॉयलट में डबल बटन वाला फलश उपकरण लगवाना होगा, ताकि शौचालय इत्यादि कामों में इस्तेमाल होने वाले पानी की खपत कम हो सके।
भवन निर्माण का नक्शा पास करवाने वाला आवेदक यदि उक्त दोनों शर्तों की पालना करने के लिए शपथ पत्र देना है, तभी म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला (एमसीए) उसका नक्शा पास करेगा, अन्यथा उसके नक्शे की फाइल को खारिज कर दिया जाएगा।
हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार ने लगाई शर्तें
दरअसल, एमसीए ने इन दोनों शर्तों को हाईकोर्ट के आदेशों के आधार पर ही आवेदकों के बिल्डिंग प्लान के साथ ही जोड़ दिया है। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका नंबर 17296 में एक फैसले में कहा गया है कि लोग अपने वाहन अथवा वाहनों को अपने भवन के अंदर ही खड़ा करना सुनिश्चित करेंगे। जबकि दूसरे फैसले याचिका नंबर 9111 में कहा गया है कि लोग अपने भवन में निर्मित शौचालयों में डबल बटन वाला फलश उपकरण लगाना सुनिश्चित करेंगे, ताकि साफ पानी को बचाया जा सके।
मौजूदा हालात है खराब, सड़कें बनी पार्किंग
हाईकोर्ट ने दोनों आदेशों को जारी करके इस समस्या के समाधान की दिशा में बढिय़ा पहल की है, लेकिन वर्तमान स्थिति यदि देखी जाए, तो वस्तुस्थिति यदि देखी जाए, घरों के बाहर वाहनों को खड़ा करने की समस्या काफी विकराल है। आलम यह है लोग अपनी कालोनियों व मोहल्लों में अपने चौपहिया वाहनों को अपने घरों के बाहर सड़कों पर ही खड़ा करते हैं।
आलम यह है कि दिन भर सड़कें वाहनों के लिए पार्किंग बनी रहती हैं, इतना ही नहीं बहुत से लोगों ने अपने घरों के बाहर ही सड़कों पर अपने वाहनों की सुरक्षा के लिए लोहे की ग्रिलें लगा ली, जिस वजह से सड़क पर वाहन खड़ा करने जितना हिस्सा लोगों के कब्जे में ही रहता है। जिससे सड़कें संकीर्ण हो जाती है और राहगीरों को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है।
अफसर, कर्मचारियों को समझनी होगी जिम्मेदारी
समाज सेवी जोगिंद्र सिंह, सोहन लाल, राजदीप सिद्धू व सुरेश कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट के ये आदेश इस समस्या का समाधान कर सकते हैं, बशर्ते एमसीए के अफसर और कर्मचारी इन आदेशों के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी समझें। उन्होंने बताया आदेश हो चुके हैं, बिल्डिंग प्लान पास करवाने वाले ने इन शर्तों को पूरा करने का शपथ पत्र दे दिया, लेकिन कम से कम ये तो बताया जाए कि इस बात को कौन चैक करेगा कि लोग अपने वाहनों को घरों के भीतर ही खड़ा कर रहे हैं।
एमसीए अफसरों को या तो इसके लिए मुहिम छेडनी होगी और थोड़ी सख्ती करनी होगी। ताकि लोग अपने वाहनों को सड़कों पर खड़ा करने की बजाए अपने घरों में रखें, या फिर किराए पर मिलने वाले गैरेज में खड़ा करें। हाईकोर्ट के आदेशों को यदि एमसीए अफसरों ने कागजी बना दिया, तो इसका लोगों को कोई फायदा नहीं होगा।
हाईकोर्ट के आदेश तो सराहनीय है। जिनकी पालना के लिए लोगों से शपथ पत्र बिल्डिंग प्लान के आवेदनों के साथ लिया जा रहा है। मगर एमसीए अफसरों और कर्मचारियों को एक अभियान इस दिशा में भी छेडना होगा। वैसे तो लोगों को खुद जनहित में अपने वाहनों को सड़कों से हटाना होगा, ताकि सड़कों व गलियों में यातायात सुलभ रहे। दूसरा, पानी बचाना तो सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, इसलिए ऐसी हर संभव कोशिश करनी होगी, जिससे जल संरक्षण हो।
- रमेश लाल मल, मेयर, एमसीए