आपको जानकर हैरानी होगी कि जनता के पास पुलिस से चार गुना ज्यादा हथियार हैं, वो भी लाइसेंस के साथ। यह खुलासा एक सर्वे में हुआ। पंजाब के इतिहास पर नजर डालें तो सदियों से यह सूबा भारत पर होने वाले हमलों का डटकर मुकाबला करता रहा है।
उस समय पंजाबियों के लिए हथियार स्टेटस सिंबल नहीं बल्कि एक जरूरत हुआ करता था। समय बदल गया, लेकिन पंजाबियों का हथियारों से लगाव अब तक नहीं छूटा। आतंकवाद के दौर के बाद तो यह लगाव और बढ़ गया। आज हालत यह है कि सूबे में पुलिस के पास जितने हथियार हैं, उनसे चार गुना लोगों के पास हैं।
आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के हर 18वें परिवार के पास आज लाइसेंसी हथियार है। जबकि अवैध हथियारों की गिनती करने का तो पुलिस के पास भी कोई पैमाना नहीं है। राज्य में कुल हथियारों की संख्या साढ़े चार लाख से अधिक है। गृह विभाग की ओर से 2016 में किए गए एक आंकलन में सामने आया है कि प्रदेश में हर 90वें व्यक्ति के पास लाइसेंसी हथियार है।
यूपी पहले, पंजाब दूसरे नंबर पर
हथियार
इस तरह लाइसेंसी हथियार रखने के मामले में पंजाब देश में यूपी के बाद दूसरे नंबर पर है। वहीं, पड़ोसी राज्य हरियाणा 1.14 लाख लाइसेंसी हथियार के साथ पांचवें नंबर पर है। वर्ष 2012 में जहां पंजाब में 3.75 लाख लाइसेंसी हथियार थे, वहीं 2016 में सूबे की आसान आर्म्स लाइसेंस नीति के चलते संख्या बढ़कर साढ़े चार लाख से ऊपर पहुंच गई है।
दूसरी ओर, पंजाब पुलिस के 82 हजार कर्मचारियों के पास हथियारों की संख्या लगभग 1.17 लाख है। यह सारा आंकड़ा लाइसेंसी हथियारों का है, लेकिन खुद पुलिस का ही मानना है कि अवैध हथियारों की संख्या लाइसेंसी हथियारों से कहीं अधिक हो सकती है।
गुरदासपुर में सबसे ज्यादा लाइसेंसी हथियार
गन शॉट
सूबे के लाइसेंसी हथियारों का जिलेवार आकलन करें तो गुरदासपुर जिले में सबसे ज्यादा करीब 36 हजार लाइसेंसी हथियार हैं। बठिंडा जिले में यह संख्या करीब 33 हजार है।
प्रदेश में आतंकवाद के दौर में इन दो जिलों में लोगों में हथियार रखने का चलन तेजी से बढ़ा था। लुधियाना जिला करीब 27 हजार, जालंधर करीब 25 हजार और पटियाला जिला करीब 24.50 हजार हथियारों की संख्या के साथ तीसरे, चौथे व पांचवें स्थान पर हैं।
हाल के दिनों में राज्य पुलिस के सामने यह तथ्य भी आए हैं कि प्रदेश का युवा वर्ग आर्म्स लाइसेंस हासिल करने की दौड़ सबसे आगे है और लाइसेंसी हथियार के रूप में ज्यादातर युवा .32 बोर की रिवाल्वर रखना पसंद करते हैं।
आर्म्स लाइसेंस बनाने की नीति की होगी समीक्षा
Gun
पंजाब की शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान लोगों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस के मुकाबले आर्म्स लाइसेंस बनवाना ज्यादा आसान हो गया था। इसी का नतीजा रहा कि सूबे में लोगों के पास लाइसेंसी हथियारों की संख्या राज्य पुलिस के मुकाबले ज्यादा हो गई।
हालांकि, पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने आर्म्स लाइसेंस नीति में बदलाव करने का एलान किया था, लेकिन अपने कार्यकाल में वे यह कार्य नहीं कर सके। अब राज्य में नई सरकार के गठन के बाद गृह विभाग फिलहाल मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास ही है।
उनके कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री आर्म्स लाइसेंस बनाने की नीति की जल्द समीक्षा करेंगे। फिलहाल वे जेलों में हिंसा के मुद्दे पर अगले हफ्ते अधिकारियों से मिलने वाले हैं। इस दौरान भी राज्य में वैध और अवैध हथियारों के मुद्दे पर चर्चा होगी।