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मजीठिया की बढ़ी मुश्किलें: 52 हजार पन्नों तक पहुंचा केस का रिकॉर्ड, ड्रग मनी के आरोप पर आमने-सामने आप-अकाली दल

Wed, 28 Oct 2026 11:04 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा

सार

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (डीए) मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने बुधवार को मोहाली की अदालत में करीब 40 हजार पन्नों का पूरक चालान दाखिल किया।
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पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (डीए) मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने बुधवार को मोहाली की अदालत में करीब 40 हजार पन्नों का पूरक चालान दाखिल किया। जांच एजेंसी ने 736.96 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का ब्योरा पेश किया है। मामले में कुल 13 आरोपियों को नामजद किया गया है जिनमें व्यक्ति और कंपनियां शामिल हैं। नए चालान के बाद पहले दाखिल चालान और अन्य दस्तावेजों सहित केस का कुल रिकॉर्ड करीब 52 से 53 हजार पन्नों तक पहुंच गया है। आम आदमी पार्टी के नेता इस रकम को नशे से अर्जित धन बता रहे हैं, जबकि मजीठिया ने आरोपों को खारिज करते हुए सरकार पर डीए मामले को ड्रग केस के रूप में पेश कर गुमराह करने का आरोप लगाया है।

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विजिलेंस की जांच 2 मार्च 2007 से 31 मार्च 2017 के बीच मजीठिया से संबंधित संपत्तियों, आय के स्रोतों और विभिन्न कंपनियों के जरिये हुए वित्तीय लेन-देन पर केंद्रित है। एजेंसी का आरोप है कि इस अवधि में ज्ञात आय के मुकाबले अधिक संपत्ति अर्जित की गई। पहले दाखिल चालान में करीब 700 करोड़ रुपये की संपत्ति और वित्तीय लेन-देन का उल्लेख था। अब जांच में संदिग्ध लेन-देन का आंकड़ा 736.96 करोड़ रुपये बताया गया है।

नकदी जमा, विदेशी संस्थाओं से लेन-देन और कंपनियों के खातों की जांच
विजिलेंस की जांच में 161 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी जमा होने, विदेशी संस्थाओं के जरिये 141 करोड़ रुपये के लेन-देन और कंपनियों के खातों में 236 करोड़ रुपये की अस्पष्ट जमा राशि समेत विभिन्न वित्तीय गतिविधियों की जांच की गई है। एजेंसी ने मजीठिया से संबंधित कंपनियों के बैंक खातों, संपत्तियों, शराब कारोबार से जुड़े वित्तीय संबंधों और विदेशी संस्थाओं के साथ लेन-देन को भी जांच के दायरे में रखा है।
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जांच में सराया इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, एसडी बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, एडी एंटरप्राइजेज, यूडब्ल्यू एंटरप्राइजेज और आकाश स्पिरिट्स समेत कई कंपनियों के वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की गई है। विजिलेंस का आरोप है कि कंपनियों के खातों में नकदी जमा होने, विदेशी संस्थाओं से वित्तीय लाभ मिलने और कुछ खातों में अस्पष्ट रकम दर्ज होने से जुड़े पहलू सामने आए हैं। एजेंसी ने मजीठिया के करीबी सहयोगी हरप्रीत सिंह गुलाटी और उससे जुड़ी कंपनियों के लेन-देन की भी जांच की है। मजीठिया के साले गजपत सिंह ग्रेवाल का नाम भी कथित आपराधिक साजिश के आरोपों के तहत सामने आया है। इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होना है।

केजरीवाल का आरोप- नशे के पैसे से कंपनियों के खाते भरे
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मजीठिया की कंपनियों के खातों में नशे से कमाए गए 736 करोड़ रुपये जमा कराए गए। उन्होंने भाजपा पर मजीठिया की पार्टी से गठबंधन कर पंजाब को फिर नशे में धकेलने की तैयारी करने का आरोप लगाया। केजरीवाल ने सवाल उठाया कि क्या गुजरात के रास्ते नशा लाकर पंजाब में बेचा जाएगा। आप के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने भी आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मजीठिया नशे के नेटवर्क को बचाने के लिए साथ आए हैं।

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया कि मजीठिया की आय में आश्चर्यजनक ढंग से 1200 गुना वृद्धि हुई। आप नेताओं ने कंपनियों के जरिये रकम जमा कराने को नशे की कमाई से जोड़ते हुए इसे गंभीर मामला बताया है। हालांकि, ड्रग मनी से संबंध के आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है।

2025 में दर्ज हुआ था मामला, सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत
विजिलेंस ब्यूरो ने 25 जून 2025 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर मजीठिया को गिरफ्तार किया था। 18 अगस्त 2025 को मोहाली की निचली अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद 22 अगस्त 2025 को करीब 40 हजार पन्नों का पहला चालान दाखिल किया गया। जांच आगे बढ़ने पर पूरक चालान भी पेश किए गए। 4 दिसंबर 2025 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली। बाद में 2 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया को नियमित जमानत दे दी थी। वह करीब सात महीने हिरासत में रहे। जमानत मिलने से आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है और मामला अदालत में विचाराधीन है।

मजीठिया बोले- डीए केस को ड्रग केस बताकर गुमराह कर रही सरकार
मजीठिया ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल सरकार की नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए आय से अधिक संपत्ति के मामले को ड्रग केस के रूप में पेश कर रहे हैं। उनका दावा है कि चार विशेष जांच टीमों के गठन के बावजूद सरकार उनके खिलाफ नशा तस्करी से जुड़े आरोप साबित नहीं कर सकी। उन्होंने 736 करोड़ रुपये की कथित ड्रग मनी और वाहनों के इस्तेमाल से अपना संबंध साबित करने के लिए ठोस सबूत पेश करने की चुनौती दी। मजीठिया ने 2018 में केजरीवाल की ओर से ड्रग संबंधी आरोपों पर माफी मांगने का हवाला देते हुए आप नेतृत्व पर निशाना साधा। उनके वकील डीएस सोबती ने कहा कि ड्रग केस और आय से अधिक संपत्ति का मामला अलग-अलग हैं। मजीठिया ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सरकार के पास सबूत हैं तो उन्हें अदालत में पेश करे।

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