एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) की ओर से पटियाला कोर्ट में दाखिल चालान में कैबिनेट मंत्री बिक्रम मजीठिया का नाम आने के बाद सियासत फिर गरमा गई है।
पंजाब प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप बाजवा ने ड्रग रैकेट की जांच सीबीआई से कराने की मांग दोहराई है। वहीं, पीपीपी प्रधान मनप्रीत बादल ने मजीठिया को कैबिनेट से बर्खास्त करने की मांग की है।
बाजवा ने कहा कि चार्जशीट में जगजीत चाहल ने कबूल किया है कि उसने 2007-12 के बीच चुुनाव फंड के रूप में मजीठिया को 35 लाख रुपये दिए थे। वहीं, बिट्टू औलख ने कहा है कि मजीठिया ने उनकी मुलाकात अपने एनआरआई मित्र सत्ता और भिंदा से कराई थी। जो ड्रग रैकेट का हिस्सा थे। बाजवा ने कहा कि ईडी की चार्जशीट में ऐसे सबूत आने के बाद ड्रग रैकेट की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
वहीं, मनप्रीत ने कहा कि ईडी द्वारा पेश किए चालान में नत्थी दस्तावेजों से ड्रग रैकेट में मजीठिया की शमूलियत स्पष्ट हो गई है। मोहाली अदालत में मुख्य आरोपी जगदीश भोला ने सिर्फ कहा था कि मजीठिया इस रैकेट में शामिल हैं। अब चाहल ने लिखित बयान में मजीठिया को 35 लाख रुपये देने की बात स्वीकार की है। बिट्टू औलख ने भी माना है कि मजीठिया ने ही उसे सत्ता से मिलवाया था।
मनप्रीत ने कहा कि ड्रग रैकेट के अहम आरोपियों के कबूलनामे के बाद मजीठिया को पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने सीएम से मजीठिया को हटाने और भाजपा से भी अपना स्टैंड स्पष्ट करने को कहा। जो पहले भी एक बार मजीठिया के इस्तीफे की मांग कर पीछे हट गई थी।