पूरे ट्राइसिटी में सबसे ज्यादा दबाव चंडीगढ़ का मध्य मार्ग झेल रहा है। यहां पीक आवर में 80,276 अधिकतम पैसेंजर ट्रिप्स होते हैं। यह हाउसिंग बोर्ड चौक से पंचकूला के कृषि भवन की सड़क से करीब दोगुना है।
रिपोर्ट में ट्राइसिटी में मौजूदा और भविष्य की ट्रांसपोर्टेशन की जरूरतें और यात्रियों की मांग को देखते हुए कई सुझाव दिए गए हैं। साथ ही इस पर आने वाले खर्चों की भी जानकारी दी गई है। 165 पेज की रिपोर्ट में चंडीगढ़ के विभिन्न रास्तों पर ट्रैफिक के दबाव की भी स्टडी की गई है। उन गाड़ियों की वजह से हो रहे प्रदूषण के बारे में भी बताया गया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर चंडीगढ़ में मेट्रो को लाने का फैसला होता है तो पंचकूला, मोहाली और सिटी ब्यूटीफुल में मेट्रो के ट्रैक और डिपो आदि बनाने के लिए 3376 पेड़ काटने पड़ेंगे। मेट्रो लाइट के लिए 3000 पेड़ काटने पड़ेंगे। रिपोर्ट में मेट्रो के चलने से पैदा होने वाले शोर की भी स्टडी की गई है। बताया गया है कि मेट्रो जब टॉप स्पीड पर होगी तो करीब 66 डेसिबल का शोर पैदा होगा। मेट्रो लाइट में यह शोर करीब 63 डेसिबल के आसपास होगा। मेट्रो की टॉप स्पीड करीब 95 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी लेकिन ट्राइसिटी में पहले फेस में जो तीन कॉरिडोर बनेंगे, उसमें औसतन स्पीड 34 किमी प्रति घंटे ही होगी। कारण यह है कि इस फेज में 70 से ज्यादा अंडरग्राउंड और एलिवेटेड स्टेशन होंगे और कई मोड़ होंगे, जिसकी वजह से रफ्तार कम रखी गई है।
राइट्स ने एएआर में चंडीगढ़ में दो कोच की मेट्रो चंडीगढ़ ट्राइसिटी में चलाने की सिफारिश की है। रहा है कि गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों तरह की जांच के आधार पर पाया गया है कि चंडीगढ़ में जन परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सबसे बेहतर विकल्प यही है। संचालन और रखरखाव के पहचाने गए सब-कॉम्पोनेंट में निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ एसपीवी मॉडल के तहत परियोजना को लागू करने की सिफारिश की गई है।
राइट्स की तरफ से सौंपे गए इस अल्टरनेटिव एनालिसिस रिपोर्ट को अगर चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा सरकार की तरफ से मंजूरी दी जाती है तो डीपीआर का काम शुरू होगा। इसी हफ्ते प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के अधिकारियों के साथ बैठक कर सकते हैं। इस रिपोर्ट को मंजूरी मिली तो चंडीगढ़ ट्राइसिटी में तीन प्राथमिकता वाले एमआरटीएस कॉरिडोर में मेट्रो (2-कोच) प्रणाली के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्र सरकार के आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) के दिशानिर्देशों के अनुसार तैयार की जाएगी।
कॉरिडोर 1: न्यू चंडीगढ़ के पारौल से पंचकूला के सेक्टर-28 वाया चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन (30 किमी)