चिकन बार को फ्राई करने की बजाय बेक्ड किया है, इसमें फैट (वसा) की मात्रा सिर्फ तीन प्रतिशत है, जबकि बाजार में मिलने वाले मीट प्रोडक्ट में फैट की मात्रा 12 से 13 प्रतिशत होती है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन की मात्रा 25 प्रतिशत है।
वहीं बाजार में मिल रहे प्रोडक्ट में सामान्यत 16 से 17 प्रतिशत प्रोटीन होता है। इसके लिए इसमें मीट पाउडर का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा चिकन बार में कैल्शियम भी है, जबकि बाजार में मिलने वाले मीट उत्पादों में कैल्शियम नहीं होता है।
बीमारियों से भी होगा बचाव
बार में इस्बगोल के छिलकों का इस्तेमाल किया गया है, जो पाचन क्रिया को मजबूत बनाएगा। इसके अलावा इसमें अलसी के बीजों का पाउडर भी डाला गया है। अलसी के बीजों में ओमेगा थ्री फैटी एसिड होता है, जो हार्ट की बीमारियों को कम करता है। इसके अलावा इसमें सोडियम क्लोराइड (नमक) अन्य उत्पादों के मुकाबले 50 प्रतिशत से भी कम है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर के रोगी भी इसका सेवन कर सकते हैं।
इस प्रोडक्ट में किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया है। उदाहरण में बाजार में मिल रहे उत्पादों में कलर और प्रिजर्वेशन के लिए सोडियम नाइट्रेट/नाइटराइट और स्वाद बढ़ाने के लिए सोडियम मोनो ग्लूटोमेट मिलाया जाता है, जो कैंसर को बढ़ावा देते हैं। मगर विश्वविद्यालय ने एलोवरा पाउड व अर्जुन ट्री की छाल का इस्तेमाल एंटी ऑक्सीडेंट व प्रिजर्वेटिव के रूप में किया है, जो पूरी तरह से प्राकृतिक हैं।
बाजार के मुकाबले काफी सस्ता है यह उत्पाद
बाजार में प्रोटीन के लिए व्हे प्रोटीन उपलब्ध है, जिसकी कीमत करीब चार हजार रुपये प्रति किलोग्राम है। वहीं विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए इस उत्पाद की कीमत 800 रुपये प्रति किलोग्राम है।
विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए इस उत्पाद को इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ बॉडी बिल्डिंग एंड फिटनेस ने भी काफी सराहा है। सिर्फ बॉडी बिल्डर ही नहीं बच्चे और बुजुर्ग को इस प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं। - डॉ. एसएस अहलावत, विभागाध्यक्ष, एलपीटी, लुवास
एक्सपीरियंस्ड लर्निंग प्रोजेक्ट का मकसद है कि विद्यार्थी अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद खुद का व्यवसाय शुरू कर सकें। इस प्रोजेक्ट के तहत उन्हें इसकी ट्रेनिंग दी जाती है। - डॉ. गुरदियाल सिंह, कुलपति, लुवास