चंडीगढ़। कोरोना के कारण सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा भी शामिल है। ‘कोरोना में उच्च शिक्षा की दशा व दिशा’ विषय पर अमर उजाला ने शनिवार को वेबिनार का आयोजन करवाया। इस अवसर पर पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों ने कहा कि बेशक उच्च शिक्षा को नुकसान हुआ, लेकिन नई चीजें सीखने का अवसर भी मिला है। ऑनलाइन शिक्षा की ओर हमारा ध्यान बिल्कुल पीछे था, लेकिन आज ऑनलाइन शिक्षा ही एक माध्यम बन गई। 70 फीसदी तक यह शिक्षा प्रभावी हो गई। धीरे धीरे लर्निंग सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय से लेकर यूजीसी तक सिस्टम विकसित करने में लगे हुए हैं। आइए जानते हैं वेबिनार में क्या कहा शिक्षकों ने-
परीक्षा न कराकर छात्रों को सीधे प्रमोट करना गलत
शिक्षकों ने बताया कि विदेशों से हम ऑनलाइन शिक्षा में काफी पीछे थे लेकिन आज करीब पहुंच रहे हैं। ऑनलाइन कोर्सेज को बढ़ाना होगा ताकि विद्यार्थी घर बैठे ही कोर्स कर सकें। ऑनलाइन ही परीक्षाएं करानी होंगी। शिक्षकों ने कहा कि परीक्षा न कराकर छात्रों को सीधे प्रमोट करने की परंपरा शुरू करना गलत है। इसके लिए नए रास्ते तलाशने होंगे।
ऑनलाइन मोड पर आ रही समस्याओं का निदान करना जरूरी
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कोरोना के कारण उच्च शिक्षा को नुकसान हुआ है, लेकिन इसके जरिये अवसर भी मिले हैं। ऑनलाइन शिक्षा की ओर पीयू ने कदम बढ़ाए हैं। शिक्षकों ने भी इस पद्धति पर काम किया है। ऑनलाइन मोड पर शिक्षा आ गई है, लेकिन गांवों में रहने वाले छात्रों को कनेक्टिविटी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसे दूर किया जाना चाहिए। पीयू की ओर से ऑनलाइन शिक्षा ईमेल, सोशल मीडिया, वीडियो कॉलिंग आदि के जरिये दी जा रही है और प्रभावी भी हो रही है। अखबारों को भी इस दिशा में और सकारात्मक कदम उठाना होगा। साथ ही शिक्षक, छात्रों को भी मिलकर काम करने की जरूरत है।
-प्रो. रोनकी राम, डीन आर्ट्स, पीयू
रिसर्च स्कॉलर्स की संख्या कम, शिक्षण संस्थानों में बुलाया जाए
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कोरोना के कारण शिक्षण संस्थानों को बंद करने से शिक्षा प्रभावित हुई। क्लास वर्क न होने के कारण ऑनलाइन कक्षाएं शुरू हुई। अब बात परीक्षाएं करवाने की आई है। यूजीसी व पंजाब सरकार की गाइड लाइन का इंतजार किया जा रहा है। थर्ड ईयर के विद्यार्थियों की परीक्षाएं होनी चाहिए। इसमें सीनियर शिक्षकों की मदद लेनी चाहिए। साथ ही विश्वविद्यालयों के पास प्लान है तो उसे भी यूजीसी के साथ शेयर करना चाहिए। रिसर्च भी कोरोना से प्रभावित हुआ, लेकिन अब शिक्षण संस्थानों में रिसर्च स्कॉलर्स को बुलाने की अनुमति देनी चाहिए, क्योंकि उनकी संख्या कम है और वह नियमों का पालन भी कर लेंगे।
- प्रो. एमसी सिद्धू, बॉटनी विभाग पीयू
ऑनलाइन शिक्षा के लिए मैनेजमेंट सिस्टम बनाने की जरूरत
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कोरोना के बढ़ते केसों के कारण आगे भी उम्मीद नजर नहीं आ रही कि शिक्षण संस्थान खुलेंगे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पढ़ाई और प्रभावित हो। इसके लिए ऑनलाइन शिक्षा ही एक चारा है। दुनिया में हम इस शिक्षा में पिछड़े हुए थे, लेकिन आज इस पर तेजी से काम हो रहा है। विश्वविद्यालयों को इस पर काम करने का मौका मिला है। लर्निंग फास्ट हुई है। इसके लिए मैनेजमेंट सिस्टम बनाने की जरूरत है। रिसॉर्सेज की कमी को पूरा करना होगा। ऑनलाइन पाठशालाओं का लाभ उठाना होगा। सरकार ने भी 32 चैनल पढ़ाई के शुरू किए हैं और इनका लाभ सभी को उठाना होगा। पीयू तेजी से ऑनलाइन शिक्षा में आगे बढ़ रहा है और शिक्षक इसके लिए पारंगत किए जा रहे हैं।
- प्रो. प्रशांत गौतम, यूआईएचटीएम विभाग पीयू
छात्रों को प्रमोट करना है तो सोचें नहीं, जल्द निर्णय लें
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कोरोना अप्रत्याशित था। उसी तरह रिजल्ट भी खोजने होंगे। अचानक कोरोना के कारण शिक्षा प्रभावित हुई और बहुत नुकसान हुआ। ऑनलाइन शिक्षा की ओर हम बढ़े, लेकिन उस पद्धति के अधिक जानकार नहीं थे। पीपीटी आदि तैयार नहीं थे। इसके कारण दिक्कतें आईं, लेकिन प्रशिक्षण आदि प्राप्त कर अब आगे बढ़ने का मौका मिला है। परीक्षाओं को लेकर निर्णय जल्द लेना चाहिए। यदि छात्रों को प्रमोट करना ही है तो अधिक नहीं सोचा जाना चाहिए। मोबाइल आदि के जरिये पढ़ाई की जा रही है लेकिन सबसे करीब रहने वाली क्लास जो सीखा देगी वह यहां से सीखने को नहीं मिलेगा। फिलहाल छात्रों के बीच बेहतर संवाद बनाए रखना होगा।
- प्रो. गुरमीत सिंह, हिंदी विभाग अध्यक्ष, पीयू
बिना किसी आधार पर छात्रों को प्रमोट करना ठीक नहीं
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थ्योरी तो जैसे तैसे हो जाती है, लेकिन प्रैक्टिकल की बाधा खड़ी होती है। वह फील्ड में ही जाकर होती है। इसके लिए एंटरप्रेन्योर की ओर कदम बढ़ाने होंगे। पूरा सिस्टम डिजिटाइजेशन की ओर ले जाना होगा। बिना किसी आधार पर छात्रों को प्रमोट करना नहीं चाहिए। परीक्षा ही छात्र की योग्यता से परिचय कराती है। यदि अभी पास कर दिया जाए, लेकिन बाद में परीक्षाएं होनी चाहिए। इंजीनियरिंग विभाग के कई छात्रों से कंपनियां डिग्री मांग रही हैं। यदि नहीं मिली तो उनका प्लेसमेंट कैंसिल हो जाएगा। इसकी ओर विश्वविद्यालयों को देखना होगा।
- प्रो. प्रवीन गोयल, सीनेटर पीयू
ऑनलाइन शिक्षा में रुचि बढ़ानी होगी
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कोरोना ने हर प्रकार की शिक्षा को प्रभावित किया है। अचानक यह विपदा आई है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा की ओर देखा जाने लगा। गूगल क्लासरूम था, लेकिन इसका प्रयोग प्रचलन में नहीं था। स्टूडेंट्स को भी डाउनलोडिंग आदि की जानकारी नहीं थी, लेकिन धीरे धीरे सभी ने सीखा। नोट्स आदि भी डाउनलोड कर पढ़ना सीखा। अब कुछ बदलाव तो दिख रहा है, लेकिन सभी को मानसिक रूप से ऑनलाइन शिक्षा के प्रति सकारात्मक होना होगा। यही विकल्प अभी बचा है। इसलिए छात्र भी पूरी तैयारी के साथ ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लें। यदि रुचि बढ़ेगी तो इस शिक्षण का भी लाभ अवश्य मिलेगा।
- डॉ. भवनीत भट्टी, स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन स्टडीज, पीयू