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मंत्री पद से इस्तीफा देने से नवजोत सिद्धू को हुए कई नुकसान, कुर्सी के साथ छूटा अपनों का हाथ

Tue, 23 Jul 2019 01:27 PM IST
खुशबू गोयल सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
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नवजोत सिद्धू
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कैप्टन अमरिंदर सिंह के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने से नवजोत सिद्धू को कई बड़े नुकसान हुए। कुर्सी तो छूटी ही, अपनों का हाथ भी छूट गया। कैप्टन मंत्रिमंडल में जेल मंत्री सुखजिंदर उर्फ सुक्खी रंधावा से नवजोत सिंह सिद्धू की खास दोस्ती थी। हमेशा सुक्खी रंधावा ही सिद्धू के साथ आकर खड़े होते थे, लेकिन इस बार रंधावा ने सिद्धू का साथ नहीं दिया।

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इसके अलावा जो और चार विधायक सिद्धू के खास थे, जिन्होंने भी उनसे दूरियां बना ली हैं। नवजोत सिंह सिद्धू ने जब कांग्रेस ज्वॉइन की थी तो पद्मश्री परगट सिंह ने हरदम उनका साथ दिया। परगट सिंह न केवल अकाली दल छोड़कर सिद्धू के साथ कांग्रेस में आए, बल्कि देश में जहां भी प्रचार के लिए सिद्धू गए, वहां पर परगट सिंह हेलीकॉप्टर में साथ-साथ रहे।

पंजाब में कांग्रेस सरकार के गठन के बाद सिद्धू की सबसे खास दोस्ती सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ हुई। दोनों ही बिक्रम सिंह मजीठिया और सुखबीर बादल के खिलाफ तीखे प्रहार करते थे, इसलिए दोनों में निकटता बन गई। इसके अलावा विधायक परमिंदर पिंकी, बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा और कुलबीर जीरा भी सिद्धू के खास दोस्तों में शामिल थे।  

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विधानसभा में तो एक बार सिद्धू ने जेल मंत्री सुखजिंदर रंधावा की तारीफ करते हुए कहा था कि एसजीपीसी पर सुखजिंदर सिंह रंधावा के नेतृत्व में कांग्रेस को आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने नारा लगाया था कि सुक्खी पाजी तुम आगे बढ़ो, हम तुमारे साथ हैं। सिद्धू और कैप्टन के बीच जब कभी खटास पैदा हुई, उसको सुक्खी रंधावा ने ही खत्म किया और समझौता करवाया।

इसके अलावा परमिंदर पिंकी और दो अन्य विधायक सिद्धू के निकटवर्ती हैं और कैप्टन व सिद्धू के बीच पुल का काम करते रहे हैं। राहुल गांधी को कैप्टन बताने वाले बयान के बाद उठे विवाद को भी सुक्खी रंधावा और सिद्धू के निकटवर्ती विधायकों ने मिल बैठकर निपटाया था।

इस बार मामला इतना बढ़ गया कि सुक्खी रंधावा के अलावा सिद्धू के निकटवर्ती चारों विधायकों को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने तेवर दिखा दिए। सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती दौर में तो कैप्टन व सिद्धू के बीच मामला निपटाने के लिए कांग्रेसी मंत्री और विधायकों ने कोशिश की, लेकिन कैप्टन का सख्त मिजाज देखकर सभी ने चुप्पी साध ली।
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