चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या में गिरावट आई है। जबकि, 80 और 90 के दशक में शहर के कई लोग निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ते थे। चुनाव मैदान से पीछे हटने का एक कारण सिक्योरिटी राशि का बढ़ाया जाना भी है। चुनाव आयोग ने पिछले लोकसभा चुनाव में सिक्योरिटी राशि में 15 हजार रुपये की बढ़ोतरी करके 25 हजार कर दी थी।
वर्ष 1996 तक उम्मीदवारों को मात्र 500 रुपये ही सिक्योरिटी राशि जमा करनी पड़ती थी। वर्ष 1998 में इस राशि बढ़कर 10 हजार रुपये कर दी गई। वर्ष 2009 में सिक्योरिटी राशि बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई थी। इसके बाद से ही निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या में गिरावट आई।
1991 में 46 उम्मीदवार थे मैदान में
चंडीगढ़ में 1996 में 35 निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। इसके बाद 1998 में सिर्फ 9 निर्दलीय उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में थे। चंडीगढ़ में अभी तक निर्दलीय उम्मीदवारों की जमानत जब्त होती रही है।
इस साल चुनाव मैदान में 8 निर्दलीय उम्मीदवार हैं, जबकि 2009 में भी 8 ही निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। वर्ष 1991 में चंडीगढ़ से सबसे अधिक निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था।
इस साल कुल 46 निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था और सभी की जमानत जब्त हो गई थी। जबकि कुल 55 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे, जिनमें से 52 की जमानत जब्त हो गई थी। इसके बाद 1996 में 35 निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा।
पिछले कुछ वर्षों में निर्दलीय उम्मीदवारों की स्थिति
वर्ष---------कुल उम्मीदवार-------निर्दलीय
1967-----------10---------------6
1971-----------11---------------8
1977-----------10---------------7
1980-----------39--------------35
1984-----------33--------------30
1989-----------27--------------19
1991-----------55--------------46
1996-----------48--------------35
निर्दलीय उम्मीदवारों की स्थिति
1998-----------18--------------9
1999-----------16-------------10
2004-----------17-------------10
2009-----------14--------------8
क्या कहते हैं निर्दलीय उम्मीदवार
मैंने 1991 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। उस समय सिक्योरिटी राशि नाम मात्र ही होती थी। इससे चुनाव लड़ने में किसी तरह का वित्तीय नुकसान नहीं होता था। अब सिक्योरिटी राशि बढ़ाकर 25 हजार कर दी गई है। इससे निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या में कमी आई है।
-अजय जग्गा, एडवोकेट
चुनाव आयोग ने सिक्योरिटी राशि में सिर्फ इसलिए बढ़ोतरी की थी, ताकि चुनाव मैदान में सिर्फ गंभीर उम्मीदवार रहें। सिक्योरिटी राशि बढ़ने से निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या भी कम हुई है।
-तिलक राज, ज्वाइंट चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर
मैं देश का नागरिक हूं और मुझे लोकसभा चुनाव लड़ने का अधिकार है। मैं लोगों तक अपने विचार पहुंचाना चाहता हूं, इसलिए चुनाव लड़ रहा हूं। अगर जमानत जब्त भी हो जाती है तो मुझे परवाह नहीं है, क्योंकि मेरा उद्देश्य जो था वह पूरा हो जाएगा।
दीपक शुक्ला, निर्दलीय उम्मीदवार