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हरियाणा में कांग्रेस को सताएंगी ये चुनौतियां

Wed, 02 Apr 2014 10:53 AM IST
प्रवीण पाण्डेय/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा में दस साल से सत्तासीन कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस विरोधी लहर (एंटी इनकंबेंसी) की भी चिंता है। दस साल में कांग्रेस सरकार लोगों की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरी, यह बात भी इस चुनाव में सामने आएगी।
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कांग्रेस के प्रत्याशी विकास का वादा कर भले ही लोगों से वोट मांग रहे हों लेकिन इस मामले में लोग अब तक के कामकाज का आकलन भी कर सकते हैं।

उत्तर हरियाणा के युवाओं की नौकरियां चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकती है वहीं केंद्र और राज्य की योजनाओं में तालमेल की खामियों को भी पार्टी को झेलना पड़ सकता है। दलित उत्पीड़न, मनरेगा में धांधली को विपक्षी प्रत्याशी जोरशोर से उठा रहे हैं।

अफसरशाही के आरोप लगे हैं अकसर

मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सामने कांग्रेसियों ने भी यह मुद्दे कई बार उठाए हैं कि फील्ड में कांग्रेसियों के ही काम नहीं हो रहे। मुख्यमंत्री स्वयं भी अफसरों की क्लास लेकर कह चुके हैं कि जनता के जायज काम किए जाएं, लेकिन सरकार में अफसरशाही के हावी होने के आरोप लगते रहे हैं।

अफसरों ने स्थानीय विधायकों को भी कोई तवज्जो नहीं दी। समय-समय पर यह मुद्दा हरियाणा विधानसभा में भी उठा है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। हालात यह हैं कि चंडीगढ़ से सटे पंचकूला में विधायक डीके बंसल को काम करवाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

सिरसा-रोहतक में दांव पर लगी है प्रतिष्ठा

सिरसा लोकसभा क्षेत्र: कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिष्ठा यहां से दांव पर है। उनका दावा है कि सिरसा में सबसे अधिक विकास हुआ, लेकिन काटन और एग्रो बेस औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने की मांग यहां हमेशा रही है।

रोहतक लोकसभा क्षेत्र: मुख्यमंत्री के गढ़ में विकास अधिक होने का आरोप है। सड़कों और शिक्षा के मामले में प्रदेश के अन्य संसदीय क्षेत्र रोहतक से बहुत पीछे हैं। सरकारी नौकरियों में रोहतक के युवाओं को वरीयता मिली है। यहां की बदहाल कानून व्यवस्था भी विरोध का कारण है।

अंबाला-करनाल में हाइवे की खस्ता हालत की चुनौती

अंबाला लोकसभा क्षेत्र: कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में यहां आईएमटी नहीं लग सका। सांसद कुमारी सैलजा और सीएम हुडडा के बीच की टग आफ वार के चलते पुराने उद्योग पलायन कर रहे हैं। एनएच-73 की फोरलेनिंग आज तक पूरी नहीं हुई। यमुनानगर की सड़कें और प्लाइवुड इंडस्ट्री आक्सीजन पर चल रही हैं। जिसके कारण यहां लोगों में रोष है।

करनाल लोकसभा क्षेत्र: पानीपत-शामली रेलवे लाइन और जीटी रोड की खस्ताहाल यहां का प्रमुख मसला है। सांसद कांग्रेस के होने के बावजूद मसला हल नहीं हुआ। सरकारी नौकरियों में युवाओं की अनदेखी पर युवा जवाब मांग रहे हैं।

सोनीपत लोकसभा क्षेत्र: दिल्ली से नजदीक होने के बावजूद सोनीपत पूरी तरह विकास नहीं कर सका। गांवो की  खस्ताहाल सड़कें और और बिजली की समस्या यहां प्रमुख है।

कुरुक्षेत्र-फरीदाबाद में स्‍थानीय समस्याओं की चुनौती

कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र: बाढ़ से बचाव और धार्मिक नगरी को विशेष पैकेज के जरिए बढ़ावा देने का मुद्दा इस लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों को परेशान कर रहा है।

भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र: औद्योगिक क्षेत्र, टूटी सड़कें, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और पक्षपात का अरोप यहां के लोग लगाते रहे हैं।

फरीदाबाद: उम्दा शिक्षण संस्थानों की कमी, दम तोड़ रहे उद्योग, गंदगी, ट्रैफिक जाम, बिजली के लंबे कट पिछले दस सालों में बदरपुर बार्डर पर लगने वाले जाम से छुटकारे के अलावा कुछ नहीं मिला।

गुड़गांव: साइबर सिटी होने के बावजूद पानी, गंदगी और टूटी सड़कों से असंतोष है। स्थानीय युवा रोजगार के मामले में पीछे रह  गए।

हिसार लोकसभा क्षेत्र : एसवाईएल का पानी मुख्य मुद्दा है। विकास में भेदभाव, औद्योगिक क्षेत्र बनाने, खस्ताहाल सड़कें, पानी, बेरोजगारी, महंगाई का जवाब जनता मांग रही है।
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क्या कहते हैं कांग्रेस अध्यक्ष

विरोधी लहर का असर चुनाव में नहीं पड़ेगा। सांसदों ने अच्छा काम किया है। हालांकि जनता की आकांक्षाएं होती हैं, लेकिन हमने वादों को पूरा किया है। इस बार हम सभी दस सीटों पर जीत हासिल करेंगे।
अशोक तंवर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हरियाणा
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