लोकसभा चुनाव 2019 सिर पर हैं, और इससे पहले ही जिंदगी के 89वें पायदान पर चल रहे पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल ने एक बार फिर अकाली दल को टूटने से बचा लिया। टकसाली अकाली सुखदेव सिंह ढींढसा के बाद पार्टी छोड़ने में अगला नंबर रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा, रतन सिंह अजनाला और सेवा सिंह सेखवां का है।
तीनों ढींढसा के काफी करीबी माने जाते हैं लेकिन पूर्व सीएम तीनों नेताओं को मनाने में कामयाब हो गए। यदि ये तीनों टकसाली पार्टी को अलविदा कह जाते तो पार्टी को जबरदस्त झटका लगना तय था। इसकी नजाकत पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल अच्छी तरह से समझ गए थे। रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा अकाली दल के टकसाली नेता रहे हैं। वह नौशहरा पन्नूआं से 1997 से लेकर 2002 और 2007 में लगातार तीन बार विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं।
ब्रह्मपुरा को माझे के शेर के नाम से भी जाना जाता है। वह 2007 में बादल सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। मौजूदा समय में ब्रह्मपुरा खडूर साहिब से सांसद हैं। वहीं रतन सिंह अजनाला भी अकाली दल के दिग्गज नेताओं में से एक हैं। अजनाला चार बार विधायक रह चुके हैं। वे 1985 में अकाली दल की तरफ से चुनाव मैदान में उतरे थे और विजेता रहे थे। 1994 में अजनाला ने आजाद उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ा था।
अजनाला ने 1997 और 2002 में फिर अकाली दल की तरफ से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वहीं सेवा सिंह सेखवां पंजाब के शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। अकाली दल माझा में तमाम फैसले तीनों नेताओं की सहमति के साथ लेता आया है। पार्टी में 2007 के बाद से बिक्रम सिंह मजीठिया अचानक काफी ताकतवर हो गए तो पार्टी के ये तीनों दिग्गज हाशिये पर चले गए।