लोकसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद शहर में सभी राजनीतिक दलों ने कई जनसभाएं की। चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के साथ साथ कई और नेताओं ने भी भाषण दिए। लेकिन भाषणों में शहर के मुद्दे कम और विपक्ष पर वार ज्यादा रहा।
भाजपा के लिए रेलगेट मुद्दा अहम रहा तो कांग्रेस के लिए बाहरी उम्मीदवार। जितनी भी जनसभाएं आयोजित हुई सभी में एक ही तरह के भाषण हुए। शहर के बड़े मुद्दों को किसी ने ढंग से नहीं छुआ।
अगर कहीं मुद्दों का उल्लेख हुआ भी तो वह विभिन्न संगठनों की ओर से बुलाए गए कार्यक्रमों में। इस बार कई संगठनों ने सभी उम्मीदवारों को बुलाया था।
व्यापारियों से लेकर उद्योगपतियों ने अपने मुद्दे इन नेताओं के सामने रखे और उनसे जवाब मांगे। इससे पहले के चुनावों में ऐसा नहीं हुआ था जब एक ही मंच पर सभी उम्मीदवार अलग अलग मुद्दों पर बोले हों।
कांग्रेस ने जहां भाजपा की उम्मीदवार किरण खेर और आप की उम्मीदवार गुल पनाग को बाहरी करार देते हुए लोगों से बॉलीवुड की अभिनेत्रियों को वापस मुंबई भेजने की बात हर भाषण में कही, वहीं भाजपा ने कांग्रेस के उम्मीदवार पवन बंसल पर हर भाषण में निशान साधा।
खेर ने जहां भी भाषण दिया, रेल घूस कांड का हवाला दिया। यह भी कहा कि पिछले 15 सालों से बंसल ने कुछ नहीं किया। आप प्रत्याशी गुल पनाग और बसपा उम्मीदवार जन्नत जहां ने भी अपने भाषणों में बंसल पर ही निशाना किया।